बलिया कांड का मुख्य आरोपी साथियों संग लखनऊ से गिरफ्तार, सरेंडर करने की फिराक में था धीरेंद्र सिंह

- सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के बाद एसटीएफ की टीम उसे लेकर बलिया के लिए रवाना होगी, जहां उसे स्थानीय पुलिस को सौंपा जाएगा

By: Hariom Dwivedi

Published: 18 Oct 2020, 03:06 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. बलिया हत्याकांड का मुख्य आरोपित धीरेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट में सरेंडर की सूचना के बाद सतर्क हुई एसटीएफ ने लखनऊ जनेश्वर मिश्र पार्क के पास उसे दो अन्य आरोपितों के साथ धर दबोचा। 15 अक्टूबर को धीरेंद्र सिंह ने पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद से वह फरार था। यूपी पुलिस की 12 टीमें उसे जगह-जगह तलाश रही थीं। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि धीरेंद्र सिंह को लखनऊ के गाजीपुर में पॉलिटेक्निक क्रॉसिंग के पास से पकड़ा गया है। उसके साथ दो अन्य आरोपित संतोष यादव और अमरजीत यादव को हथियारों संग गिरफ्तार किया गया है। अज्ञात स्थान पर तीनों से पूछताछ की जा रही है। घटना के समय इस्तेमाल किए गए हथियारों पर एसटीएफ अधिक जानकारी जुटा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के बाद एसटीएफ की टीम उसे लेकर बलिया के लिए रवाना होगी, जहां उसे स्थानीय पुलिस को सौंपा जाएगा।

इससे पहले पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष चंद्र दुबे ने फरार आरोपियों के खिलाफ 50-50 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया था। इन सबके खिलाफ रासुका व गैंगस्टर कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। अब तक इस मामले में धीरेंद्र के दो भाई देवेंद्र सिंह और नरेंद्र सिंह के साथ 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पांच नामजद हैं।

सरेंडर करने की फिराक में था मुख्य आरोपी
बलिया गोलीकांड में फरार मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह सरेंडर करने की फिराक में था। इसके लिए उसने कुछ करीबी नेताओं और पुलिसवालों से संपर्क भी किया था। उन्हीं की सलाह पर धीरेंद्र वकीलों के जरिये सरेंडर करना चाह रहा था। जानकारी के मुताबिक, सरेंडर का पूरा प्लान बन चुका था, लेकिन ऐन मौके पर एसटीएफ ने उसे धर दबोचा।

क्या है पूरा मामला
15 अक्टूबर को बलिया जिले की ग्राम सभा दुर्जनपुर व हनुमानगंज की कोटे की दो दुकानों के आवंटन के लिए पंचायत भवन में खुली बैठक बुलाई गई थी। एसडीएम बैरिया सुरेश पाल, सीओ चंद्रकेश सिंह, बीडीओ गजेंद्र प्रताप सिंह और रेवती थाने का पुलिसबल भी मौजूद था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हंगामा होते ही अधिकारियों ने बैठक स्थगित कर दी और जाने लगे। बैठक स्थगित होने के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान विवाद होने पर धीरेंद्र सिंह ने जयप्रकाश पाल की हत्या कर दी। इसके बाद वह भाग निकला था। मामले में एसडीएम और सीओ को निलंबित भी कर दिया गया है।


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