यूपी के तीन जिले खसरा मुक्त, चंदौली में सबसे ज्यादा प्रकोप

Laxmi Sharma

Publish: Mar, 14 2018 02:08:56 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
यूपी के तीन जिले खसरा मुक्त, चंदौली में सबसे ज्यादा प्रकोप

उत्तर प्रदेश में फ़ैजाबाद, संत कबीरनगर और महोबा जिलों को पूरी तरह खसरा मुक्त कर घोषित कर दिया गया है।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में फ़ैजाबाद, संत कबीरनगर और महोबा जिलों को पूरी तरह खसरा मुक्त कर घोषित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश हेल्थ मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम के 2017-18 के सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश में खसरे को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, उसके मुताबिक पूरे प्रदेश में इस बीमारी से 4789 लोग ग्रसित पाए गए हैं। प्रदेश में सबसे अधिक मामला चंदौली जनपद में सामने आया है।

ग्रामीण क्षेत्र में अधिक प्रकोप

प्रदेश में इस वर्ष कुल 4789 खसरा के मरीज पाए गए हैं। इन मरीजों में 4758 मरीज सरकारी अस्पतालों में जबकि 31 मरीज निजी अस्पतालों में पाए गए हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि इस बीमारी का प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। कुल मरीजों में 4181 मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से जबकि 608 मरीज शहरी क्षेत्रों से सामने आये हैं।

सबसे ज्यादा मरीज चंदौली में

खसरा के सबसे अधिक मरीज चंदौली जनपद में सामने आये हैं। चंदौली के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण में 641 मरीज चिह्नित हुए जबकि शहरी क्षेत्र में एक भी मरीज नहीं पाया गया। सोनभद्र में 226, मिर्जापुर में 212, हापुड़ में 240 और झांसी में 280 मरीज सामने आये हैं। इसके अलावा काशी रामनगर में 103, पीलीभीत में 112, इटावा में 113, लखनऊ में 131, ललितपुर में 138, चित्रकूट में 160, बहराइच में 164, सिद्धार्थ नगर में 180, गोंडा में 190 और अलीगढ में 192 मरीज पाए गए।

तीन जिले खसरा मुक्त

वर्ष 2017 - 18 के सर्वेक्षण में संत कबीरनगर, फैजाबाद और महोबा को खसरा मुक्त घोषित किया। इन तीनों जनपदों में खसरे का एक भी मरीज नहीं पाया गया। इसके अलावा कुशीनगर और कन्नौज में मात्र एक-एक मरीज पाए गए हैं। बिजनौर, फर्रखाबाद, देवरिया, मैनपुरी, मथुरा और रामपुर में किसी भी जिले में 5 से अधिक मरीज नहीं मिले। कानपुर नगर में 8, संत रविदास नगर में 6 और सुल्तानपुर में 6 मरीज मिले हैं।

जानलेवा हो सकता है खसरा

लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित सीएचसी की बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शुचि कुमार ने बताया कि खसरे से बचने के लिए दो खुराक टीका लगाया जाता है। दोनों ही टीके जरूरी हैं। दो टीकों के के विकल्प में नया टीका एम.आर यानि खसरा और रूबेला वैक्सीन आता है। प्रदेश के कई जिलों में अभी यह टीका निशुल्क उपलब्ध नहीं है। डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के आयुष चिकित्सक डॉ एस के पाण्डेय के मुताबिक इस बीमारी में रोगी का शरीर बहुत तेजी से कमजोर होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी घटने लगती है। इलाज में देरी पर लीवर और किडनी पर असर पड़ता है और इलाज में लापरवाही पर मरीज की मौत भी हो सकती है।

यह है खसरा की पहचान

खसरा एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है। संक्रमित मरीज के सांस के जरिये मीजल्स वायरस दूसरो तक पहुंचने पर यह बीमारी फैलती है। इससे ग्रसित रोगी का शुरू में गला खराब होता है फिर उसे बुखार आता है। यह बीमारी खास तौर पर 9 माह से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्वाधिक होती है। खसरे में पहले चार दिन तक काफी तेज बुखार आता है। इसके बाद तापमान 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। रोगी की आँखों में लाली, सूजन और खुजली होती है। रोगी के गले में दर्द, खांसी, जुकाम और नाक से पानी बहता है और तेज बुखार आता है। साथ ही थकान लगती है। पूरे शरीर पर दाने निकल आते हैं जो नुकीले होते हैं और फोड़े जैसे आकार ले लेते हैं। दाने के ऊपर के हिस्से में मवाद भर जाता है और नीचे के हिस्से में लाली होती है।

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