ज्योतिषियों ने बताया महाशिवरात्रि की सही तारीख, जानें जल अभिषेक, पूजाविधि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों ने बताया महाशिवरात्रि की सही तारीख, जानें जल अभिषेक, पूजाविधि और शुभ मुहूर्त

Neeraj Patel | Publish: Feb, 28 2019 02:36:00 PM (IST) | Updated: Mar, 04 2019 10:16:54 AM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) 2019 में ४ मार्च कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को है, जल अधिषेक करने का शुभ टाइम 04:27 बजे से है और जानें कैसे करें भगवान शिव की पूजा।

 

यूपी. हिन्दू धर्म में देवों के देव महादेव का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि (Mahashivratri) २०१९ में मनाने के लिए शिव भक्तों में अभी से काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। महाशिवरात्रि पर्व पर महादेव की पूजा के लिए सभी शिव मन्दिरों में जोरों से तैयारियां चल रही है। महाशिवरात्रि पर्व के दिन महादेव के जल अभिषेक के लिए यूपी के सभी शिव मन्दिरों में सुबह होते ही भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। सभी भक्तों द्वारा शिव मन्दिरों में जल के साथ-साथ भगवान शिव का दूध से भी अभिषेक किया जाता है और पूजा अर्चना भी की जाती है। शास्त्रों के अनुसार - सारे देवताओं में महादेव ऐसे देव हैं, जो अपने भक्‍तों की भक्ति और पूजा से बहुत जल्‍दी खुश हो जाते हैं और उनकी मनोकामना पूरी कर देते हैं।

महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

शिवमहापुराण के अनुसार जब भगवान नारायण व ब्रह्मा जी में वर्चस्व को लेकर युद्ध हुआ था तब उन दोनों के बीच में एक शिवलिंग प्रकट हुआ था। शिवलिंग का दर्शन कर दोनों ने विचार किया कि जो इस शिवलिंग का प्रारम्भ या अन्त का दर्शन कर लेगा, वही पूज्यनीय होगा। यह सुनकर ब्रह्मा जी हंस स्वरूप में व नारायण शूकर स्वरूप में आकाश व पाताल को गमन किया। ब्रह्माजी जब आकाश की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने ऊपर से केतकी के फूल को आते हुए देख पूछा, कि क्या वह प्रारम्भ से आ रहा है? तब केतकी के फूल ने कहा, कि वह तो मध्य भाग से हज़ारों वर्षों से गिरता चला आ रहा है।

ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से नारायण के सामने झूठ बोलने को कहा, कि वह यह पुष्टि(गवाही) करें, कि ब्रह्मा जी ने इस शिवलिंग का प्रारम्भ खोज लिया है। केतकी फूल को लेकर ब्रह्मा जी भगवान नारायण के पास आए व फूल द्वारा झूठी पुष्टि (गवाही) भी करवाई। नारायण जी ने इस पर ब्रह्मा जी का पूजन किया, उसी समय उस शिवलिंग से भगवान शिव ने प्रकट होकर क्रोध में भैरव प्रकट कर उसे आज्ञा देकर ब्रह्मा के पांच मुखों में से, जिस मुख ने झूठ बोला उसका छेदन करवा दिया। अन्त में नारायण जी स्तुति पर प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ब्रह्मा को अभय दान दिया। जिस दिन यह कार्य हुआ। उस दिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। तभी से हरसाल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि कब है?

इस बार 2019 में म? शिवरात्रि ??ि (Maha Shivratri) 4 मार्च दिन सोमवार को है, जिसके लिए अभी से उत्तर प्रदेश के जिलों के फेमस शिव मन्दिरों की सजावट के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। काशी के काशीविश्वनाथ शिव मन्दिरों के चारों ओर विशेष रूप से सुरक्षा को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। जिससे शिव भक्तों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही कई जिलों से तो अभी से कुछ लोग कांवर यात्रा के साथ कुम्भ के शाही स्नान के लिए रवाना हो चुके हैं। जो वहां जाकर शाही स्नान करेंगे।

महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त | Mahashiv Ratri Ka Shubh Mahurt

जालौन निवासी ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने बताया है कि 4 मार्च 2019 महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त का समय दिन सोमवार को सुबह 04:28 से शुरू होगा और 5 मार्च दिन मंगलवार को सुबह 07:07 तक रहेगा। इस बार शुभ मुहूर्त में पूजा करने का विशेष संयोग बन रहा है। इस शुभ मुहूर्त के समय में भगवान शिव का जलअभिषेक करने से भक्तों को हर मानोकामना पूरी होगी।

महाशिवरात्रि पर जलअभिषेक का समय

महाशिवरात्रि 2019 के पर्व पर भगवान शिव के जलअभिषेक का समय (Jalabhishek ka Time) 4 मार्च को सुबह 04:13 बजे से शुरू होकर 10:25 बजे तक रहेगा। इसलिए सभी भक्त जलअभिषेक के टाइम पर ही भगवान शिव को जल चढ़ाएं। महाशिवरात्रि 2019 के पर्व पर सभी शिवभक्त सही और शुभ समय में ही भगवान शिव का जलअभिषेक करें। महाशिवरात्रि पर सही और शुभ समय में ही भगवान शिव का जलअभिषेक करने लोगों को सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है और साथ ही मनोकामना भी पूरी हो जाती हैं।

महाशिवरात्रि का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि का सोमवार के दिन पड़ना और साथ ही प्रयागराज में चल रहे कुम्भ का शाही स्नान भी 4 मार्च को पड़ना बहुत ही शुभ माना जा रहा है। इसलिए कुम्भ के शाही स्नान के साथ होने के कारण महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया हैं। कुम्भ के शाही स्नान के साथ-साथ सभी शिवभक्त भगवान शिव का जलअभिषेक करेंगे तो उनकी मनोकामना पूरी हो जाएगी।

महाशिवरात्रि व्रत का समय

महाशिवरात्रि व्रत का समय भी शुभ मुहूर्त (MahaShiv Ratri Vrat ka Shubh Mahurt )के समय के साथ 4 मार्च दिन सोमवार को सुबह 04:28 से शुरू होकर 5 मार्च दिन मंगलवार को सुबह 07:07 तक रहेगा। इस समय में महाशिवरात्रि का व्रत रखने से भोलेनाथ शिव शम्भू अपने भक्तों से जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपनेे सभी भक्तों की मनोकामना पूरी कर देते हैं।

महा शिवरात्रि पूजा विधि

- महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले सभी भक्त सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- इसके बाद भगवान शिव का जल अभिषेक करने के साथ धतूरा, और वेलपत्र भी चढ़ाएं।
- इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

- महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे आपके मन को शान्ति मिलेगी।
- इसके बाद भगवान शिव को दूध चढ़ाएं और उनको मीठे फल भी चढ़ाएं।
- भगवान शिव का भोग में मीठे फल में बेर चढ़ाने बहुत अधिक महत्व है। इसलिए उनके भोग में बेर को जरूर शामिल करें।
- इसके बाद भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करें।

महाशिवरात्रि व्रत रखने के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

- महाशिवरात्रि व्रत रखने वाले शिव भक्त बिना कुछ खाए निर्जला व्रत भी सकते हैं।
- महाशिवरात्रि व्रत रखने वाले शिव भक्त नमक रहित खाना न खाएं।
- शिव भक्तों को महाशिवरात्रि व्रत के समय अगर भूख लगती है तो वह फलाहार कर सकते हैं।

- महाशिवरात्रि व्रत के समय शिव भक्त फलाहार सेव, अनार, अंगूर, केला, और संतरा आदि शामिल कर सकते हैं।
- शिव भक्तों को व्रत के समय विशेष ध्यान रखना होगा जिससे उनका व्रत न टूटे।

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