वेट लिफ्टिंग करते हैं और हैवी डायट लेते हैं, तो हो सकता है हार्ट अटैक

वेट लिफ्टिंग करते हैं और हैवी डायट लेते हैं, तो हो सकता है हार्ट अटैक

Mahendra Pratap Singh | Publish: Sep, 03 2018 06:15:09 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 06:53:46 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

क्विक रिजल्ट्स के लिए कुछ फूड सप्लिमेंट जैसे कि आर्टिफिशल प्रोटीन का सेवन किया जाता है, जो कि बॉडी बनाने की बजाय बिगाड़ सकती है

लखनऊ. बिजी लाइफस्टाइल में अपनी सेहत का ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है। आजकल के युवा खुद को फिट रखने के लिए हेल्दी डायट कम और सप्लिमेंट्स ज्यादा लेते हैं। लिहाजा ये उन्हें अच्छी हेल्थ देने के बजाय बीमारी के अंधेरे में धकेल रहा है। आजकल वेट लिफ्टिंग का क्रेज लोगों में देखने को मिलता है। न सिर्फ युवा बल्कि 30 से 35 की उम्र के लोग भी वेट लिफ्टिंग करते हैं। वेट लिफ्टिंग के लिे लोग हैवी डायट का सेवन भी करते हैं। इसी के साथ क्विक रिजल्ट्स के लिए कुछ फूड सप्लिमेंट जैसे कि आर्टिफिशल प्रोटीन का सेवन किया जाता है, जो कि बॉडी बनाने की बजाय बिगाड़ सकती है।

प्रोफेशनल ट्रेनर की निगरानी में करें वेट लिफ्टिंग

हम जानते हैं यह बात अजीब लग सकती है लेकिन पद्म भूषण पुरस्कार विजेता डॉक्टर के के तलवार का कहना है कि वेट लिफ्टिंग आपके शरीर पर नेगेटिव इम्पैक्ट डाल सकता है। यंगस्टर्स में आजकल बॉडी बनाने का क्रेज ज्यादा है। लेकिन बिना प्रोफेशनल ट्रेनर के वेट लिफ्टिंग जैसी एक्सरसाइज करना खतरनाक साबित हो सकता है। जो लोग इसके साथ सप्लिमेंट लेते हैं उनकी हेल्थ पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है। इससे सबसे ज्यादा खतरा हार्ट अटैक होने का होता है।

सप्लिमेंट्स का इस्तेमाल सही नहीं

इस मामले में लखनऊ से केजीएमयू के डॉक्टर राजीव गुप्ता का कहना है कि सेहत का ख्याल रखना अच्छी बात है। लेकिन किसी भी चीज का इस्तेमाल बिना जानकारी के करना घातक हो सकता है। पेपर्स में कई तरह के सप्लिमेंट का विज्ञापन दिया होता है, जिनके बहकावे में आकर लोग अक्सर सेहत के साथ खिलवाड़ कर बैठते हैं। इस तरह की चीजों का इस्तेमाल करने से बेहतर है कि हम योग करें, साइकिल चला कर खुद को फिट रखें या फिर वॉकिंग करें। इसके अलावा यह बात भी ध्यान देने वाली है कि वेट लिफ्टिंग के लिए हैवी डायट की जगह हेल्दी डायट लेना चाहिए।

रिसर्च में सामने आई थी यह बात

पीजीआई चंदीगढ़ में किए गए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ था कि भारत में 100 में से 25 पेशंट्स ऐसे होते हैं, जिनकी मौत का कारण हार्ट अटैक होता है। इनकी मौत भी 35 या उससे कम उम्र में होती है। भारत में हार्ट अटैक का खतरा 20 फीसदी है, जबकि विदेश में यह सिर्फ 5 फीसदी है।

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