छात्रों को खिलाया पोषक आहार

कृषि विज्ञानं केंद्र द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम

मंडला। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञानं केंद्र मंडला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ विशाल मेश्राम के मार्गदर्शन में केंद्र के वैज्ञानिको डॉ आरपी अहिरवार एवं डॉ प्रणय भारती द्वारा ग्राम खुक्सर के आंगनवाड़ी एवं शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय मे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत छात्रों को पोषण आहार दिया गया एवं आहार में पोषक तत्वों के महत्व को तथा साथ ही स्वच्छता पर भी विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में लगभग 120 छात्र सहित विद्याालय के समस्त अध्यापक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका तथा कर्मचारी उपस्थित रहे। केंद्र के प्रमुख डॉ विशाल मेश्राम ने कहा कि पूर्व में राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान छात्रों को पोषक आहार के रूप में पोषक खिचड़ी प्रदान की गई थी तथा छात्रों के विचार जानने पर उनके द्वारा पोषक आहार के रूप में खीर, पुड़ी, पनीर, पुलाव, सलाद आदि शामिल करने की इच्छा व्यक्त की गई थी। गौरतलब है कि ग्रामीण आदिवासी अंचल के बच्चों को ऐसा भोजन समान्यत: उपलब्ध नहीं हो पाता है। अत: इस अवसर पर छात्रों की इच्छापूर्ति के लिए केन्द्र द्वारा भोजन में मेवा, काजू बादाम युक्त खीर, पुड़ी, मटर-पनीर, सोयाबीन बड़ी-गोभी मटर युक्त पुलाव, सलाद आदि को पोषक आहार के रूप शामिल किया गया। डॉ विशाल मेश्राम ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए पहली शर्त ही स्वच्छता है। बच्चों व परिवार के पोषण का ध्यान रखें, बच्चे स्वस्थ रहें, इसके लिए गर्भावस्था के समय से ही गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण का ध्यान रखा जाए। डायरिया व एनीमिया न हो इसके लिए जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि प्रत्यके बच्चे के लिए मां के गर्भधारण से एक हजार दिन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चों में समय से कुपोषण की पहचान कर उसका प्रभावी ढंग से निराकरण किया जाए। स्वस्थ बच्चे ही देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए बच्चों के पोषण में विभागों के साथ आम लोगों की सहभागिता जरूरी है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत की कल्पना तभी साकार होगी, जब देश का हर व्यक्ति स्वस्थ होगा। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आरपी अहिरवार ने पोषण वाटिका पर बताया कि पोषण वाटिका उस वाटिका को कहा जाता है, जो घर के अगल बगल में ऐसी खुली जगह पर होती हैं, जहाँ पारिवरिक श्रम से परिवार के इस्तेमाल के लिए विभिन्न मौसमों में मौसमी फल तथा विभिन्न सब्जियाँ उगाई जाती है। बाजार में बिकने वाली चमकदार फल सब्जियों को रासायनिक उर्वरक प्रयोग कर के उगाया जाता है इन रासायनिक दवाओं का कुछ अंश फल सब्जी में बाद तक बना रहता है, जिस के कारण उन्हें इस्तेमाल करने वालों में बीमारियां से लडऩे की ताकत कम होती जा रही हैं, इसलिए हमें अपने घर के आंगन या आसपास की खाली जगह में जैविक खादों का इस्तेमाल कर के रसायन रहित फल सब्जियों को उगाना चाहिए जैविक उत्पाद (रसायन रहित) होने के कारण फल व सब्जियों में काफी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, परिवार के लिए ताजा फल सब्जियां मिलती रहती हैं, गृह वाटिका लगा कर महिलाएं अपनी व अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ प्रणय भारती ने पशुधन से प्राप्त होने वाले उत्पादों का मानव पोषण मे महत्व के बारे मे बताते हुए कहा की दूध में सभी तत्व पर्याप्त मात्रा में होने के साथ-साथ ही उनमें आपस में उचित अनुपात अथवा संतुलन रहता है जिससे शरीर द्वारा उनका उपयोग अधिकतम होता है। दूध एक मृदु तथा हल्का आहार है जिसे नवजात शिशु, बच्चे, प्रौढ़ बूढ़े तथा स्तन पान कराने वाली एवं गर्भवती महिलाएं एवं रोगी भी सुचारू रूप से उपयोग कर सकते है। दूध, दही और दूध के उत्पादों से भी अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। ये विटामिन-ए, विटामिन-डी और कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत है। तंदुरूस्त हड़डियों के लिए विटामिन-डी और कैल्शियम अनिवार्य होता है। परीक्षणों से यह सिद्ध किया जा चुका है कि दूध पाने वाले छात्रों के शरीर भार तथा ऊँचाई में अधिक वृद्धि होती है बच्चों का मानसिक विकास भी अधिक होता है। ऐसे परिवार जो मांसाहारी हैं वह घर में खाये जानेवाले सभी खाद्य पदार्थ शिशु को खिला सकते हैं। इन पदार्थों से अच्छी पदार्थ मात्रा और गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन ए और डी मिलता है। जहां मांसाहारी लोगों को मीट, मछली, अंडा और अन्य विभिन्न प्रकार के एनिमल प्रोटीन के पौष्टिक आहार उपलब्ध हैं वहां शाकाहारियों के हिस्से में मात्र प्रोटीन, दालें और सोयाबीन या मशरूम ही उपलब्ध हैं। भारत में प्रति व्यक्ति लगभग 65 अंडे प्रतिवर्ष खाये जाते हैं जबकि संतुलित आहार पाने के लिए प्रतिवर्ष 180 अंडे खाने की पुष्टि राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद के द्वारा की गई है। अंडों में प्रोटीन, वसा, विटामिन्स (ए,डी, बी6, बी1 और बी12) के साथ ही साथ लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस और अन्य खनिज पदार्थ भी प्राप्त होते हैं। उक्त कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव ले रहे रावे कृषि छात्रों का भी योगदान रहा।

Sawan Singh Thakur
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned