अपने सुख-चैन को त्याग, दूसरों की भलाई में जुटी नर्स

कोरोना संक्रमण में जोखिम उठाकर अपने दायित्वों का कर रही निर्वाहन

By: Mangal Singh Thakur

Published: 12 May 2021, 01:47 PM IST

मंडला. निवास. दो वर्षों से कोरोना काल में चिकित्सक व नर्स जिस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे है यह ईश्वर की कृपा ही है। चिकित्सक व नर्स की ड्यूटी मानें तो 24 घंटे की रहती है। चिकित्सक व नर्स एक सिक्के के दो पहलू हैं। ऐसे भी कहा गया है कि चिकित्सक भगवान का रूप होता है। इसलिए जो दर्जा दिया गया है उसपर खरा उतरना हमारा दायित्व है। चिकित्सक की राय पर नर्स मरीजों को भली-भांति अपनी सेवा देकर उचित मार्ग प्रशस्त करती है और जीवन सुरक्षित करती है। जो वह कोरोना संक्रमण का समय हो, प्रकृतिक आपदा या दुर्घटना बिना नर्स के मरीजों को समय पर स्वस्थ्य करना संभव नहीं है। यूं भी कह सकते हैं कि मरीजों को जिंदा रखने में नर्सों की बड़ी भूमिका होती है। वह गंभीर से गंभीर मरीज की देखभाल करती हैं। अपने सुख-चैन को त्याग कर दूसरों की भलाई के लिए काम करती हैं। उनके योगदान और बलिदान के जज्बे को सलाम करने के लिए ही 12 मई का दिन नर्स डे के लिए चुना गया है।


दो साल की बेटी को छोड़ा पिता के सहारे
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र निवास में कार्यरत एनएनएम दुर्गेश्वरी वाल्के पति मनीष धुर्वे 27 वर्ष आठ माह से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में सेवा दे रही है। दुर्गेश्वरी मवई के रहने वाली है जिनका विवाह बालाघाट बैहर में हुआ है। पति मनीष धुर्वे डिंडोरी जिले के शहपुरा में क्लर्क हैं। दुर्गेश्वरी की ड्यूटी निवास के कोविड केयर सेंटर में लगी है। जिसके कारण उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ रहा है। सेवा देते वह खुद पॉजिटिव हो गई थी। उपचार के बाद कुछ ही दिनों में दुर्गेश्वरी कोरो ना को हरा दिया ओर वह फिर से कोविड केयर सेंटर में मरीजो की देखभाल में लग गई है। दुर्गेश्वरी पिछले दो माह से अपनी बेटी से नहीं मिली है। समय मिलता है तो मोबाइल से बात कर लेती हैं। इनकी बेटी कुछ पिता के साथ शहपुरा में ही रह रही जो की कुछ दिन से बीमार है। लेकिन कोरोना की जंग को जीतने के लिए ममता को मारकर संघर्ष करना पड़ रहा है।


छोटी बहन की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारी
मंडला में रहने वाली एएनएम शालिनी श्रीवास जुलाई 2019 से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नारायणगंज में सेवा दे रही हैं। समान्य मरीजों के साथ ही कभी दुर्घटना में घायल तो कभी गंभीर मरीजों की सेवा भी शालिनी को करती है। कई बार ऐसा मौका भी आ जाता है कि भोजन भी नहीं कर पाती। शालिनी पर परिवार की जिम्मेदारी भी है। वृद्ध माता पिता व छोटी बहन मंडला में रहते हैं। छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रही है। सप्ताहिक अवकाश के दिनो में शालिनी को अपने परिवार के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। इनका कहना है प्रसूता से लेकर विभिन्न बीमारी के मरीज रोजाना पहुंचते है। इनकी देखभाल करना मेरी पहली जिम्मेदारी है। कोरोना संक्रमण को लेकर हमेशा डर बना रहता है, लेकिन जो मरीज आता है उसका इलाज करना मेरी पहली प्राथमिकता है।


माताओं के लिए वरदान बनी मधु राठौर
निवास सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में 20 वर्षों से सवा देनी वाली एएनएम मधु राठौर पति अनिक कुमार 49 वर्ष माताओं के लिए वरदान से कम नहीं है। निवास में दशकों से महिला चिकित्सक नहीं है। ऐसे में डिलेवरी केस की जिम्मेदारी उनपर अधिक है। मधु का परिवार जबलपुर में रहता है इनकी एक बेटी खुशी राठौर 18 वर्ष की हैं ओर इनके पति जबलपुर में एक प्राईवेट नोकरी करते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकत्सक न होने के चलते स्टाफ नर्स मधु ही निवास में प्रसव का कार्य करती है। महिलाएं बिना संकोच के मधु को अपनी समस्याएं बता देती है। महिला चिकत्सक न होने के चलते शुरू में मधु को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन लगभग 20 वर्षों से अपनी सेवा देते देते निवास क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है। वहीं कोरोना काल में जहां ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्रसव कराना सुरक्षित समझ रही है। मधु ने पिछले एक साल में आधा सैकड़ा से अधिक सुरक्षित प्रसव कराया हैं। मधु ने बताया कि निवास की स्टाफ नर्स देववती, पूनम जैन, पदमा मरावीख् मनीषा नागपुरी, दुर्गा आदि का पूरा सहयोग उन्हें मिलता है। जिससे वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कर पा रही हैं।

Mangal Singh Thakur
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