रिपोर्ट आने के पहले खप जाएगी मिठाइयां

अधिकारी ले रहे सैंपल, तत्काल जांच की नहीं व्यवस्था

By: Mangal Singh Thakur

Published: 12 Nov 2020, 05:28 PM IST

मंडला. त्यौहार में मिठाई व अन्य सामग्रियों की जांच महज औपचारिक ही रह गई है। त्यौहार के एक सप्ताह पूर्व से सैंपलिंग लेनी शुरू की जाती है लेकिन रिपोर्ट आने के पहले ही पूरी सामग्री खप जाती है। सामग्री गुणवत्ता पूर्ण होने या ना होने की जानकारी के पहले ही उपभोक्ता इसका उपयोग कर चुके होते हैं। ऐसे में सामग्री की जांच सिर्फ औपचारिक ही समझ आती। इस बार भी दीपावली के पहले फूड सेफ्टी विभाग ने मिठाई दुकानों की जांच शुरू कर दी है। लेकिन लैब से रिपोर्ट त्योहार बीत जाने के करीब 15 दिन बाद आएगी। जिले में 500 से अधिक मिठाई दुकान हैं, लेकिन विगत एक सप्ताह के भीतर मात्र दो दर्जन सैंपल लिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई तेज की जाएगी क्योकि जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आता है, नकली मिठाइयों के कारोबार में भी तेजी आती है। 14 को दीपावली, 15 को गोवर्धन पूजा और 16 को भाई दूज है। तीन दिनों में ही शहर में करोड़ों रुपए की मिठाइयों का कारोबार हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब त्योहार नजदीक आता है तो सैंपल लिया जाता है। जब तक रिपोर्ट आती है तब तक सारी मिठाइयां खप जाती है। जिस दुकान से मिठाई का सैंपल लिया जाता है, उसे भी सील नहीं किया जाता है। वह मिठाई ही लोगों को बेच दी जाती है।
त्योहार ही नहीं पूरे सालभर मिलावट खोरी का खेल चलता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी चुप्पी साधे रहते हैं। दूध-घी, तेल, मिठाई, मावा, मसाले, बेसन-मैदा यहां तक कि शीतल पेय में सालभर मिलावट का खेल चलता है। कभी कभार विभाग कार्रवाई करता भी है तो उसकी रिपोर्ट का कुछ पता नहीं चलता है।
पूरे संभाग में एक मोबाइल वैन
जबलपुर संभाग में हजारों मिठाई दुकानों की जांच के लिए सिर्फ एक मोबाइल वैन है। वैन से तुरंत जांच रिपोर्ट मिल जाती है, हालांकि इसे प्रामाणिक नहीं माना जाता। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि मोबाइल वैन से दुकानों पर मिठाई का सैंपल लेकर जांच किया जाता है। अमानक पाए जाने पर दुकानदार को हिदायत देकर पूरी मिठाई फेंकवा दी जाती है। त्योहार से पहले मिठाइयों की खास डिमांड नहीं रहती इसलिए मोबाइल वैन से त्यौहार के एक दो दिन पूर्व जांच कर उपभोक्ताओं को बीमार होने से बचाया जा सकता है। लेकिन जिले तक मोबाइल वैन भी नहीं पहुंचती है। साल में दो चार दिन भेजकर मोबाइल वैन का सिर्फ प्रदर्शन ही किया जाता है।
पेंडेंसी निपटाने पर ध्यान नहीं
जांच के लिए विभाग की ओर से सैंपल तो साल भर लिए जाते हैंए लेकिन उनकी रिपोर्ट समय पर न आने के कारण पेंडेंसी बढ़ रही है। जनवरी से लगभग 50 सैंपल ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई। इसके बाद विभाग की ओर से दीपावली पर सैंपलिंग की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में खाद्य निरीक्षक भले ही जिम्मेदारी से काम करे, लेकिन लैब से रिपोर्ट न आने तक कोई कार्रवाई उसके द्वारा नहीं की जा सकती।


जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान
मिठाइयों अन्य खाद्य पदार्थों के मिस ब्रांडेड पाए जाने पर अधिक से अधिक दो लाख रुपए तक का जुर्माने करने का प्रावधान है। इसमें खाद्य पदार्थ मिठाइयों के दूसरे ब्रांड का लेबल लगाने जैसे मामले है। सब स्टैंडर्ड या मिस ब्रांडेड मिलने पर कोर्ट केस डालने का प्रावधान है। इसके साथ ही सजा का भी प्रावधान है। वहीं सब स्टैंडर्ड पाए जाने पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। सब स्टैंडर्ड में खाद्य पदार्थों में विभिन्ना तत्वों की जो मात्रा अंकित होती है उनमें कमी पाई जाती है। सरकार ने मिठाइयों पर निर्माण तिथि एवं एक्सपायर डेट भी लिखने का प्रावधान मिठाइयों के लिए किया है। जांच के दौरान अधिकारी नियमो के पालन की हिदायत भी दे रहे हैं।


57 प्रकरण में एक लाख का जुर्माना
खाद्य एवं औषधि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने पिछले छह माह में 75 प्रकरण बनाए हैं। जिसमें 17 की सैंपल की रिपोर्ट अमानक आए है और एक सैंपल असुरक्षित पाया गया है। पापड़ी, पान मसाला, खोवा पेड़ा एवं खोवा के सौंपल अमानक पाए गए हैं। 16 प्रकरण में एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
इनका कहना
दुकानों से सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल लैब में भेजा जाता है। लैब से जांच रिपोर्ट में आने में समय लगता है। जिले में मोबाइल वैन नहीं है। वहीं मोबाइल वैन की जांच रिपोर्ट प्रामाणिक नहीं मानी जाती।
वंदना जैन, निरीक्षक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग

Mangal Singh Thakur
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