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मकान तो बनाया जा रहा आलीशान, लेकिन नही दिया जा रहा वॉटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम

शुल्क वसूली तक सीमित अधिकारी, नही कर रहे जागरूक

मंडला

Updated: May 24, 2022 03:34:34 pm

मंडला. जल संरक्षण के प्रति भले ही जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हों या सामाजिक संस्थाएं लगातार लोगों को जागरूक कर रही हो, लेकिन न तो लोग सजग हो रहे हैं लोग भले ही पैसा खर्च कर रहे हों, लेकिन उन्हें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगवाना मंजूर नहीं हैं। जबकि 300 मीटर वर्गमीटर के मकान में ज्यादा भूखंड पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना जरूरी है, लेकिन एक भी मकान में हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है।
एक ओर जहां इन दिनों जलसंरक्षण के लिए तालाबों और नदियों के गहरीकरण, सरोवरों को निर्माण की कवायद चल रही है। वहीं दूसरी ओर पानी को बचाने के प्रयासों को लेकर आवासीय हिस्सा अछूता नजर आ रहा है। जिसका उदाहरण शहर और जिले भर में बन रही कॉलोनियों के निर्माणाधीन आवासों में देखा जा सकता है। यहां लोग अपने मकानों का निर्माण तो भव्य और आलीशान तरीकों से करा रहे हैं, लेकिन घरों में लगने वाले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर आज भी उदासीन बने हुए हैं। गौरतलब है कि गिरते भू-जल स्तर को लेकर वॉटर हार्वेस्टिंग योजना मील का पत्थर साबित हो सकती थी। परंतु यह योजना महज कागजों तक सिमट कर रह गई है। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते शहरी क्षेत्र में बनाये जा रहे नये मकानों में से चंद लोगों ने ही वॉटर हार्वेस्टिंग को अपनाया है। नगर में बीते एक दशक में मकान तो हजारों बनें लेकिन जलसंकट समेत पानी सहेजने का इंतजाम महज कुछ लोगों ने ही किया। प्रशासन की अनदेखी के चलते वॉटर हार्वेस्टिंग योजना कागजों में सिमट कर रह गई हैं। जानकारों की माने तो शहरी क्षेत्र में बन रहे नये मकानों में से महज 5 प्रतिशत लोगों ने ही वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया है। वहीं ग्रामीण और निकाय क्षेत्रों में तो यह भी नजर नहीं आता। शहर में लगातार इमारतें बनने का सिलसिला तो बदस्तूर जारी है परंतु इन इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को नजर अंदाज किया जा रहा है।
वापस हो जाती है राशि
नगर पालिका के पीडब्लूडी शाखा के अधिकारी सुरेन्द्र सिंग का कहना है कि हमारे पास पिछले एक साल से वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर कोई फाईल नही आई है। जिला प्रशासन द्वारा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का शुल्क ऑनलाईन निर्धारण किया गया है। यह शुल्क एरिया के हिसाब से लिया जाता है। भवन निर्माणकर्ता ऑनलाईन शुल्क जमा करता है। शुल्क जमा करके निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण करवाता है तो नगर पालिका द्वारा उसकी शुल्क दी गई राशि वापस कर दी जाती है। लेकिन निर्माणकर्ता ऑनलाईन शुल्क जमा कर दिया है और निरीक्षण नहीं करवाया है तो उसकी राशि बिना निरीक्षण के वापस नहीं की जाती है वह राशि नगर पालिका में ही जमा रहती है। नगरपालिका के इंजीनियर प्रवीण ठाकुर ने बताया कि नियमों की मानें तो 1000 वर्गफुट या इससे अधिक क्षेत्र में बनने वाले मकानों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी है। नगरपालिका द्वारा बिल्डिंग निर्माण की परमीशन के दौरान इसके लिए पैसा जमाया कराया जाता है और सिस्टम लगाने के उपरांत यह पैसा वापिस कर दिया जाता है। जिस मकान की एस्टीमेट कास्ट 10 लाख से अधिक होती है उसकी अनुमति के लिए वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मद से 7 हजार से 15 हजार रुपए जमा कराने होते हैं। यह राशि ऑनलाइन जमा होती है। जो कि सिस्टम तैयार करने के बाद वापस भी कर दी जाती है। जरूरी है गंभीर प्रयास समय रहते जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लोगों को स्वयं जागरूकता दिखाना होगी। प्रशासन स्तर से भी इस संबंध में मानीटरिंग जरूरी है। प्रशासन को नगरीय निकायों में मुहिम चलाकर नये निर्माणों में लगे वाटर हावेस्टिंग सिस्टमों की जांच करनी होगी।
वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए शुल्क निर्धारित
140 स्क्वायर फिट से लेकर 200 तक - 7000 रुपए
200 स्क्वायर फिट से लेकर 200 तक - 10,000 रुपए
300 स्क्वायर फिट से लेकर 200 तक - 12,000 रुपए
400 स्क्वायर फिट से ऊपर तक के - 15,000 रुपए

मकान तो बनाया जा रहा आलीशान, लेकिन नही दिया जा रहा वॉटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम
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