पढ़ाई छोड़ बच्चों से धुलवा धूल रहे थे पेटी

कोरोना काल में भी लग रही प्राथमिक शाला

By: Mangal Singh Thakur

Published: 25 Feb 2021, 10:12 AM IST

मंडला. प्राचीन काल में गुरूकुल हुआ करते थे जहां बरगद के पेड़ के नीचे कक्षाएं लगाई जाती थी व विद्यार्थियों से शिक्षक काम भी कराया जाता था। जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर माली मोहगांव में भी कुछ ऐसा ही नाजारा देखेने को मिला। जहां बरगद के नीचे कुछ बच्चे पढ़ाई कर रहे थे तो कुछ बच्चों से स्कूल की साफ सफाई कराई जा रही थी। जो कि शासन के नियम के विरुद्ध है। प्राचीन काल में गुरूओं को दक्षिणा मिलती थी जिससे गुरुकुल का संचालन होता था। लेकिन अब स्कूल के संचालन के लिए शिक्षकों को वेतन मिलता है इसके साथ स्कूल के रखरखाब के लिए भी अलग से राशि जारी की जाती है। इसके बाद भी शिक्षकों के आदेश पर बच्चों से काम कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमण काल में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल बंद है। शासन के निर्देश के अनुसार मोहल्ला क्लास लगाई जा रही है। फिर भी प्राथमिक शाला मालीमोहगांव में स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

शाला में दर्ज 58 बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है। सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। लंबे समय बाद स्कूल खुलने से स्कूल की सामग्री अस्त व्यस्त व गंदगी पसरी हुई थी। जिसे साफ करने की जिम्मेदारी भी बच्चों को दे दी गई। मालीमोहगांव स्कूल में बच्चों से स्कूल की पेटी पानी से धूलावाई जा रही थी। जैसे ही पत्रिका टीम मौके पर पहुंची कैमरा देखते ही शिक्षक सक्रिय हुए और बच्चों से काम बंद करने को कहने लगे। लेकिन बच्चे आधा काम बीच में छोडऩे को तैयार नहीं थे और शिक्षकों के मना करने के बाद भी पेटी की सफाई करते रहे। कुछ पेटियां पहले ही धूलकर सूखने को रख दी गई थी।


मोहल्ला क्लास का नाम समूह में बैठ रहे बच्चे
स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि शासन के निर्देश के बाद जिन स्कूलों में मैदान व बाहर बैठने की सुविधा है वहां कक्षा लगनी प्रारंभ हो गई है। प्राथ शाला माली मोहगांव में बच्चों को बरगद की छांव के नीचे पढ़ाया जा रहा है। जबकि कोरोना के नये प्रकरण आने के बाद जिला प्रशासन फिर से सतर्क हो गया है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में लापरवाही देखने को मिल रही है।

इनका कहना
लंबे समय से स्कूल बंद रहने के कारण पेटी में धूल मिट्टी जम गई थी। जिसे मजदूर लगाकर साफ कराया जा रहा है। मजदूर दूसरे काम में व्यस्थ था तो बच्चों की मदद ली गई।
दशरथ सिंह वालरे, शाला प्रभारी

Mangal Singh Thakur
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