इस फसल को किसानों ने बो तो दिया लेकिन अब रोने को हो रहे मजबूर

इस फसल को किसानों ने बो तो दिया लेकिन अब रोने को हो रहे मजबूर

harinath dwivedi | Publish: Feb, 15 2018 02:06:47 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

- २० हजार रुपए प्रति बीघा का हो रहा नुकसान

मंदसौर.
किसानों के लिए सफेद चांदी कही जाने वाली ऊंटी किस्म लहसुन अबकी बार किसानों के लिए भारी नुकसानी का सौदा साबित हो रही है। महंगे भाव का बीज खरीदकर लहसुन लगाने वाले किसानों को अब मंडियों में ले जाकर फसल बेचने पर आर्थिक लाभ के बजाय प्रति बीघा करीब 20 हजार से ज्यादा की नुकसानी का सामना करना पड़ रहा है।
मालवा अंचल में पिछले कुछ सालों से ऊंटी लहसुन पर किसानों का खासा दांव रहता हैै। इस बार भी नगरी सहित दलोदा तहसील में ऊंटी लहसुन का रकबा दूसरी परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक है। किंतु इस बार ज्यादा रकबा होने से मंडियों में ऊंटी लहसुन के भाव औंधे मुंह गिर गए है। किसानों ने सबसे बड़ा दांव ऊंटी लहसुन पर ही लगा रखा था। किंतु भावों ने किसानों की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है।
20 हजार में खरीदा बीज, अब 2 हजार में बिक रही फसल
क्षेत्र के कई किसानों ने माह सितंबर-अक्टूबर में ही तमिलनाडु की मेटरापोल्यम मंडी में पहुंचकर करीब 20 हजार के भाव की ऊंटी लहसुन बीज खरीदते हुए समय पर उटी लहसुन लगाने से जल्दी पकने पर मंडी में अच्छे भाव मिलने की उम्मीद में खरीफ की सोयाबीन या दूसरी फसले तक अपने खेतों में नहीं लगाई थी। किंतु अब किसानों को मंडी में फसल ले जाने पर भाव 2000 से 2800 तक ही मिल रहे है।
किसानों का कहना...
- किसान देवीलाल धाकड़ ने बताया कि 4 बीघा में 1 लाख 70 हजार का बीज लगाया। उत्पादन 40 क्ंिवटल हुआ, ढाई हजार रुपये क्ंिवटल के भाव से 1 लाख की लहसुन हुई। सभी खर्चे जोडऩे पर करीब डेढ़ लाख की नुकसानी हुई है।
- मंगेश धाकड़ का कहना है कि ढाई बीघा में ऊंटी लहसुन लगाई थी, पांच क्ंिवटल बीज 17 हजार रुपये प्रति क्ंिवटल के भाव से खरीदा था। भावों को देखते हुए अब नुकसानी के अलावा कुछ नहीं है।
- कमलेश धाकड़ का कहना है कि बारिश की फसल छोडक़र खेत खाली रखकर दो बीघा में 80 हजार का बीज खरीदकर उटी लहसुन लगाई थी। 26 क्ंिवटल निकली, जिसको 2750 रुपये के भाव बिकी। दूसरे खर्चे तो दूर बीज का पैसा भी उपर पड़ रहा है।
स्टोरेज की भी रहती है समस्या
किसानों का मानना है कि ऊंटी किस्म की लहसुन दो से तीन महिनों तक ही रोककर रख सकते है। इसके बाद लहसुन खराब होने लगती है। जिसके चलते किसान इस फसल को निकलने के बाद ही बेचना शुरु कर देता है। इन दिनों मंडियों में भी लहसुन की बंपर आवक हो रही है क्योकि किसानों को एक तरफ तो लहसुन के खराब होने की आशंका रहती है दुसरी और भारी भरकम व्यय करने के कारण उधारी चुकाने के लिए भी कम भाव होने के बावजूद ऊंटी फसल बेचना पड़ रही है। किसान रामेश्वर अटोलिया का कहना है कि अच्छी तरह पकी ऊंटी लहसुन को अधिकतम तीन से साढ़े तीन महीने ही घरों में रख सकते है, मजबूरन अच्छे भावों के इंतजार के बिना ही फसल को बेचना पड़ता है। इस सीजन में मंडियो में ऊंटी के जो भाव मिल रहे है वो काफी कम है, जिसके चलते किसानों के लिए भारी भरकम नुकसानी की खेती साबित हो रही है।
आवक बढऩे से भाव गिरे
दलोदा मंडी में मंगलवार को लहसुन की करीब 4 हजार बोरी की आवक रही, भाव अधिकतम 2800 रुपये रहे है। मंदसौर मंडी में भी आवक करीब 10 हजार बोरी रही है। आवक बढऩे से भावों मे गिरावट हो रही है। किसानों को तो वास्तव में नुकसान हो रहा है।
- मनोहरलाल धाकड़, लहसुन व्यापारी, कृषि उपज मंडी दलोदा
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फैक्ट फाइल-
1 बीघा में बीज करीब 2 क्ंिवटल
एक नजर में उटी लहसुन खर्च (प्रति बीघा)-
बीज - 40 हजार
चौपाई एवं निंदाई- 8 हजार
खाद दवाईयां- 7 हजार
कटाई मजदूरी- 5 हजार
उत्पादन -17-20 क्ंिवटल
आय- 35 -40 हजार
नुकसानी- 20 हजार

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