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अमेरिका के दबाव में नहीं आने वाला भारत, दोबारा शुरू की ईरान से तेल आयात सेवा

हर दिन बढ़ते पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ाते ही जा रहे हैं।

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अमेरिका के दबाव में नहीं आने वाला भारत, दोबारा शुरू की ईरान से तेल आयात सेवा

नई दिल्ली। हर दिन बढ़ते पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ाते ही जा रहे हैं। ऐसे में आम जनता इससे परेशान हैं। पेट्रोल - डीजल के दामों की बढ़ाने की मुख्य वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों हैं। अमेरिका के इन प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल लेना लगभग नामुमकिन हो गया हैं। ऐसे में आम जनता को इन परेशानियों से निजात दिलाने के लिए मोदी सरकार ने एक फैसला लिया हैं। जिसके चलते भारत ने अब ईरानी टैंकर्स से अपने यहां पेट्रोलियम प्रोडक्ट मंगाने का निर्णय लिया है। भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद रिफायनर्स को ईरान से तेल आयात करने की इजाजत दे दी है। इसके साथ ही सरकार ने बड़े तेल आयातकों जिनमें शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया (एससीआई) भी शामिल है। इनसे वादा किया गया है कि यदि उन्हें नुुसकान होता है तो उसकी भरपाई की जाएगी।


दोबारा शुरू होगी तेल आयात सेवा
ईरान पर लगाए गए ताजा प्रतिबंधों के चलते ईरान से आयॅल इम्पोर्ट बंद होने का चीन, तुर्की समेत भारत ने नया तोड़ निकाल लिया है। एक समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अब ईरानी टैंकर्स से अपने यहां पेट्रोलियम प्रोडक्ट मंगाने का निर्णय लिया है। बता दें कि अमेरिका की ओर से ईरान पर नवंबर में नए सिरे से प्रतिबंध लगने वाले हैं। ऐसे में चीन और भारत इससे निपटने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। ईरानी टैंकर्स से ऑयल मंगाना इसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 2015 में यूएस को एक परमाणु डील से बाहर कर लिया था जो ईरान और 6 बड़े देशों के बीच होनी थी। साथ ही ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाने की बात भी कही थी।

अमेरिकी को समझाने की कोशिश
गुरुवार को भारत व अमेरिका की टू प्लस टू वार्ता में ईरान का मुद्दा निश्चित तौर पर हावी रहेगा, लेकिन भारत इस पर झुकने के मूड में कतई नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री व रक्षा मंत्री की टीम को भारत यह समझाने की भरपूर कोशिश करेगा कि ईरान के साथ उसके रिश्ते को कमजोर करने का मतलब होगा भारत को कमजोर करना। साथ ही भारत यह भी बताएगा कि किस तरह से ईरान के साथ उसके रिश्ते इस क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए भी जरुरी है। भारत को भरोसा है कि इन तर्को पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल पोम्पीओ उसी तरह से रजामंद होंगे जैसे पूर्व विदेश मंत्री जेम्स टिलरसन हुए थे। भारत ने अपनी तरफ से ये साफ कर दिया है की वो ईरान से तेल इंपोर्ट को लेकर पर अमेरिका के दबाव में नहीं आने वाला हैं।