4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पूंछरी में श्रद्धालुों ने गिरिराज जी से क्षमा याचना मांग की पूजा अर्चना

याचिकाकर्ता का आरोप है कि एनजीटी की फटकार के बाद भी भरतपुर प्रशासन गिरिराज जी को सम्मान नहीं दे रहा है।  

2 min read
Google source verification

मथुरा

image

Amit Sharma

Mar 22, 2018

Govardhan Parikrma

मथुरा। गिरिराज जी पर जेसीबी चलाये जाने पर श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। भक्तों ने गिरिराज जी से क्षमा याजना कर शिलाओं पर दुग्धाभिषेक किया। रोली, कलावा, धूपबत्ती जलाकर पूजा अर्चना की। गिरिराज जी से अपराध होने पर क्षमा मांगी। गिरिराजज भक्त सुशील अग्रवाल ने बताया कि सात कोस में फैले गिरिराज जी साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हैं। इनके साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। विकास कार्य बाहर होने चाहिए न कि शिलाओं के बीच गड्ढे खोदकर होने चाहिए। भरतपुर प्रशासन को मालुम है कि यहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। गिरिराज जी की पूजा की जाती है फिर भी जेसीबी लगाकर अपराध कर डाला। बाबा गंगादास ने बताया कि जिसने भी यह कार्य किया है उसको भगवान सजा अवश्य देगा।

गिरिराज जी पर जेसीबी नहीं रूकती तो आत्मदाह कर लेते

पूंछरी में गिरिराज जी पर जेसीबी चलते देख सबसे पहले रोजाना परिक्रमा करने वाले बाबा गंगा दास ने विरोध किया था। उनके विरोध के चलते मामला एनजीटी पहुंच गया और एनजीटी ने भक्तों की भावनाओं को समझते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। गंगा दास बाबा का कहना है कि अगर गिरिराज जी पर जेसीबी चलती तो वे आत्मदाह कर लेते। गिरिराज जी की पूजा बालक के भाव में होती है जब जेसीबी चल रही थी तो गिरिराज जी का लाल रंग देख उनके आंखों से आंसू निकल रहे थे।

भरतपुर प्रशासन अब नहीं दे रहा है गिरिराज को सम्मान

याचिकाकर्ता आंनद बाबा के साथ प्रार्थनापत्र देने वाले सत्यप्रकाश मंगल ने बताया कि एनजीटी की फटकार के बाद भी भरतपुर प्रशासन गिरिराज जी को सम्मान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि काम रोके जाने के बाद जेसीबी से कार्य कराया गया जबकि उनको सम्मान पूर्वक गिरिराज जी की शिलाओं को रखना था। इस मामले में एनजीटी को अवगत कराएंगे।

गिरिराज जी भी हमारी आस्था का केन्द्र

वहीं राजस्थान सीमा में ब्रज विकास के परियोजना अधिकारी आशाराम सैनी ने बताया कि गिरिराज जी हमारी आस्था का केन्द्र हैं। काम रोके जाने के बाद गिरिराज जी की इधर-उधर बिखरी शिलाओं को हाथों से रखा गया है। गिरिराज जी के ऊपर मशीनरी का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। एनजीटी न्यायालय के आदेशों को पालन किया जाएगा।