Lok Sabha Chunav 2019: ये सिर्फ गेहूं, ट्रैक्टर, घूंघट, खरहरी खाट नहीं, वोटों की फसल है, जिसे काट रही हैं हेमा मालिनी

बृजवासियों को लुभाने के लए हेमा मालिनी ने फिल्म ‘शोले’ के संवाद ‘चल धन्नो बसंती की इज्जत का सवाल है’ को कुछ यूं बदला

By: Bhanu Pratap

Updated: 08 Apr 2019, 12:58 PM IST

डॉ. भानु प्रताप सिंह
आगरा/मथुरा। हेमा मालिनी। फिल्म अभिनेत्री हैं। 70 साल की उम्र में भी ‘ड्रीम गर्ल’ हैं। फिल्म शोले की बसंती हैं। तीन लोक से न्यारी नगरी मथुरा की सांसद हैं। मतलब नाम ही काफी है। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी हैं। चुनाव हैं तो गांव-गांव जाना पड़ रहा है। अपने पांच साल के कार्यकाल में बमुश्किल एक साल भी मथुरा में नहीं रहीं। मतलब लोगों से दूरी बनाकर रखी। इस कारण ग्लैमर बना हुआ है। लोग सभा में देखने भी आ रहे हैं। चुनाव के चलते वे गेहूं, ट्रैक्टर, घूंघट, खरहरी खाट, लकड़ी का बोझा ले जा रही अम्मा के साथ अम्मा के साथ फोटो वायरल कराकर वोटों की फसल काट रही हैं।

हेमा मालिनी

जाति से ऊपर फिर भी ‘चौधरी हेमा मालिनी’ का नारा

हेमा मालिनी जाति, धर्म, प्रांत आदि से बहुत ऊपर हैं। कोई उनकी जाति नहीं पूछता है। फिर भी फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र की पत्नी होने के नाते ‘जाट’ होने का ठप्पा है। कोई कुछ भी कर ले, चुनाव में जाति का बोलबाला हो ही जाता है। फिर चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष। तभी तो सभाओं में ‘चौधरी हेमा मालिनी-जिन्दाबाद’ का नारा भाजपा कार्यकर्ता लगाने से नहीं चूकते हैं। वे मतदाताओं को यह जताना और बताना चाहते हैं कि हेमा मालिनी जाट हैं। असल में मथुरा लोकसभा सीट जाट बहुल है। इसी कारण इस सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का दबादबा था। हेमा मालिनी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करके रालोद के दबदबे की हवा निकाल ही। यहां से रालोद के महासचिव जयंत चौधरी को हराया। इसका ऐसा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा कि गठबंधन होने के बाद भी जयंत चौधरी मथुरा से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं कर सके।

हेमा मालिनी

बृजवासियों की नब्ज पकड़ी

राजनीतिक दृष्टि से बात करें तो हेमा मालिनी कोई अच्छी वक्ता नहीं हैं। हां, आज भी लोग हेमा मालिनी को प्रत्यक्ष रूप से देखना चाहते हैं। इसी कारण सभाओं में भीड़ जुटती है। सभाओं में वे एक संवाद जरूर बोलती हैं- ‘चल धन्नो बसंती की इज्जत का सवाल है।‘ लोग यह संवाद सुनना भी चाहते हैं। बृज यानी मथुरा में हेमा मालिनी ने यह संवाद बदल दिया है। वे कहती हैं- ‘चल धन्नो बृज की इज्जत का सवाल है।‘ मांट विधानसभा क्षेत्र के जैसवा गांव में अपनी कार से प्रचार करते समय उन्होंने यह संवाद बोला। उनका कार की छत खुल जाती है। इसके साथ ही वे भाषण की शुरुआत राधे-राधे से करती हैं। बीच-बीच में जय श्रीकृष्णा, बांके बिहारी लाल की जय बोलती हैं। इन्हें सुनकर लोग आह्लादित हो जाते हैं। मतलब ये है कि हेमा मालिनी ने बृजवासियों की नब्ज पकड़ ली है। बृज में किए गए विकास कार्यों की बात करती हैं। हेमा मालिनी ने महावन तहसील के बल्देव में रावल गांव को गोद लिया है। इसके विकास का उदाहरण देती हैं। यह बात अलग है कि रावल गांव का पूर्ण विकास होना अभी बाकी है।

हेमा मालिनी

तस्वीरों में हेमा मालिनी

हेमा मालिनी ने पिछले दिनों गेहूं के खेत में जाकर किसानों के साथ गेहूं की फसल काटी। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। इन तस्वीरों से उन्हें खूब प्रचार मिला। सात बार के विधायक रहे गठबंधन के नेता श्याम सुंदर शर्मा को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने हेमा मालिनी को चुनौती देते हुए कहा- ‘हेमा मालिनी एक बीघा गेहूं काट दें, हम गठबंधन प्रत्याशी को वापस ले लेंगे।‘ हेमा मालिनी ने इसका कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया। फिर उनकी तस्वीर आई घूंघट में। एक सभा में मंच की ओर जाते समय उन्होंने घूंघट किया तो बुजुर्गों को अच्छा लगा। फिर तस्वीर आई आलू के खेत में ट्रैक्टर चलाते हुए। इसके बाद सिर पर लकड़ी का गट्ठर ले जाते हुए बुजुर्ग महिला के साथ फोटो खिंचवाई। चुनाव प्रचार के दौरान खरहरी खाट पर बैठीं। ये सभी तस्वीरें सोशल मीडिया पर धड़ाधड़ अग्रसारित की गईं। लोगों को इस तरह की और अजूबी तस्वीरों का इंतजार है।

हेमा मालिनी

सुरक्षा घेरा

चुनाव प्रचार के दौरान हेमा मालिनी सुरक्षा घेर में रहती हैं। उनसे कोई हाथ नहीं मिला सकता है। कोई छू नहीं सकता है। वे जब सभास्थल पर आती हैं तो भीड़ बेकाबू हो जाती है। ऐसे में वे कार में ही बैठी रहती हैं। जब सुरक्षा घेरा बन जाता है, तब वे कार से उतरती हैं। उनके साथ चलने वाले भाजपा कार्यकर्ता भी दूर-दूर ही चलते हैं। ऐसे में आम जनता उनके निकट आ सकती है, यह सोचा भी नहीं जा सकता है। कुल मिलाकर मथुरा के चुनाव में हेमा मालिनी केन्द्र में हैं।

हेमा मालिनी

मुकाबला कड़ा

चुनाव एकतरफा है, ऐसा कहा नहीं जा सकता है। उनके मुकाबले में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेन्द्र सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी महेश पाठक हैं। मुकाबला कड़ा है। हालांकि भाजपाइयों को भरोसा है कि हेमा मालिनी एक बार फिर से जीत का रिकॉर्ड कायम करेंगी। कांग्रेस की ताकत लगातार कम हो रही है। 2014 में कांग्रेस मुख्य मुकाबले से बाहर थी। गठबंधन के सभी वोट अगर प्रत्याशी को मिलते हैं तो कड़ी टक्कर होगी। फिर भाजपा और गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा।

लोकसभा चुनाव 2014 का परिणाम

हेमा मालिनी भाजपा, 5,74,633 (53.29 प्रतिशत)

जयंत चौधरी, रालोद 2,43,890 (22.62 प्रतिशत)

पंडित योगेश कुमार द्विवेदी, बसपा 1,73,572 (16.10 प्रतिशत)

चरन सिंह, सपा, 36,673 (3.40 प्रतिशत)

 

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