अंतर्देशीय पत्र में लोग उड़ेल कर रख देते थे भावनाएं
चिट्ठी के रोचक किस्सों को साझा करते हुए मथुरा शहर के महापौर मुकेश आर्य बंधु बताते हैं कि चिट्ठियों का जमाना मैंने बड़े नजदीक से देखा है। उस समय एक अंतर्देशीय पत्र आता था। जो करीब दो पेज का होता था। अंतर्देशीय पत्र लिखते समय लोग अपनी भावनाएं मानों उड़ेल कर रख देते थे। एक पोस्टकार्ड भी आता था, उसके माध्यम से भी अपनी बात कहा करते थे। पत्र लिखने के बाद लोग अक्सर एक बात लिखा करते थे, 'थोड़े लिखे को बहुत समझना, आगे आप खुद समझदार हैं।' इसको पढ़ने वाला समझ लेता था कि जहां से चिट्ठी आई है, उसने किस मुद्दे पर लिख कर भेजा है।