
नवजात की पोलियो वैक्सीन में मिला ये खतरनाक वायरस, प्रदेशभर में दवा पिलाने पर लगार्इ रोक
केपी त्रिपाठी, मेरठ। पोलियो को जड़ से खत्म करने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग को सप्लाई की गई पोलियो वैक्सीन में ही ऐसा खतरनाक वायरस मिला कि सरकार को इसे बंद करने के निर्देश देने पड़े। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में बच्चों को पोलियो की पी-2 टाइप दवा पिलाने पर रोक लगा दी है। नवजातों केा पिलाने वाली इस पी-2 टाइप वैक्सीन में पोलियो टाइप-2 का वायरस पाया गया। अगर ये वैक्सीन बच्चों को पिला दी जाती तो बच्चों को पी-2 टाइप का पोलियो होने के सौ फीसदी चांस थे। इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
पोलियो उन्मूलन अभियान को लगा झटका
बताते चलें कि पी-2 टाइप वैक्सीन को बायोमेड कंपनी स्वास्थ्य विभाग को सप्लाई देती है। एक यही कंपनी है जो स्वास्थ्य विभाग को इस टाइप के पोलियो वैक्सीन की सप्लाई करती आ रही है। अन्य कंपनियों की वैक्सीन नहीं होने से नवजात बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई। बच्चों को पी-2 टाइप की पोलियो वैक्सीन नहीं पिलाई जा रही। इससे पोलियो उन्मूलन अभियान को भी झटका लगा है।
टाइप-टू वायरस मिलने से मचा हड़कंप
बायोमेड कंपनी की ओरल पोलियो वैक्सीन में टाइप-टू वायरस मिला था। पोलियो वैक्सीन में ही टाइप-टू वायरस मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर बच्चों को यह वैक्सीन पिलाने पर रोक लगा दी गई। हालांकि परिवार कल्याण महानिदेशक डा. नीना गुप्ता की ओर से जारी इस आदेश में वैक्सीन पिलाने पर रोक लगाने की वजह नहीं बताई गई है, लेकिन महानिदेशक के आदेश के बाद जिलों से वैक्सीन को वापस मंगा लिया गया है।
बच्चों में मिले लक्षण तो जांच में पाया वायरस
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वैक्सीन यूपी के सभी जिलों में सप्लाई की गई थी। हाल ही में इस पोलियो वैक्सीन में टाइप-टू वायरस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में नीचे से ऊपर तक खलबली मच गई। प्रदेश के लखनऊ, गाजीपुर, अलीगढ़, हाथरस, देवबंद, मुरादाबाद आदि शहरों में कुछ बच्चों के मल में इसके वायरस के प्रारंभिक लक्षण मिलने के बाद जांच की गई तो पता चला कि पोलियो वैक्सीन के जरिए यह वायरस उनमें पहुंचे हैं। इसके बाद परिवार कल्याण महानिदेशक की ओर से पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर
पोलियो वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लिए बायोमेड समेत पांच कंपनियां दवा सप्लाई करती है। बायोमेड की बनाई ओरल वैक्सीन में टाइप-टू पोलियो वायरस पाया गया। जांच में स्पष्ट हो गया कि वैक्सीन से ही इन बच्चों में यह वायरस पहुंचा है। उसके बाद बायोमेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।
बोले अधिकारी
मेरठ के जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. विश्वास चौधरी ने बताया कि पी-2 टाइप की पोलियो वैक्सीन न पिलाने के आदेश ऊपर से ही आए हैं। वैसे भी मेरठ और इसके आसपास के क्षेत्र में पी-2 टाइप का पोलियो वायरस पूर्णरूप से खत्म हो गया है, लेकिन फिर भी कभी-कभी किसी वैक्सीनेशन चक्र में इसको रिपीट किया जाता है। इस बार ऊपर से ही इसकी वैक्सीन को बच्चों को न पिलाने के आदेश आए हैं। आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि क्यों नहीं पिलाई जाए।
Published on:
5 Oct 2018, 6:08 PM IST
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