भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला: 12 सितंबर तक नजरबंद रहेंगे पांचों आरोपी, सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पुलिस पर की सख्त टिप्पणी

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला: 12 सितंबर तक नजरबंद रहेंगे पांचों आरोपी, सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पुलिस पर की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पुलिस पर भी टिप्पणी की।

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई बुधवार तक टाल दी गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी आरोपियों की घर में नजरबंदी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख तय की है। जबतक सभी पांचों आरोपी नजरबंद रहेंगे।बता दें कि पांचों की गिरफ्तारी पर पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ट्रांज़िट रिमांड की मांग को खारिज करते हुए सभी को उनके आवास में ही गुरुवार तक नजरबंद रखने का आदेश दिया था। बता दें कि याचिका में पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है। इतिहासकार रोमिला थापर के साथ 5 लोगों ने याचिका दी थी । इस याचिका में प्रोफ़ेसर सुधा भारद्वाज, वरवर राव, अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा और वेरनन गोंज़ाल्विस की गिरफ्तारी को चुनौती दी है।

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पुणे पुलिस पर कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश चंद्रचूड ने पुणे पुलिस पर कड़ी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसा कह सकती है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। प्रेस से बात करने को लेकर असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ( ASG ) तुषार मेहता ने कोर्ट से माफी मांगी है। उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है, इसे रोका तो यह फट जाएगा। दूसरी ओर याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि एफआईआर में गिरफ्तार किए लोगों का नाम तक नहीं है, जबकि पुणे पुलिस की ओर से ASG तुषार मेहता कहा था कि याचिका दायर करने वालों का इस मामले का कोई संबंध नहीं है। वहीं पुणे पुलिस ने इनआरोपियों को माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत गिरफ्तार किया था। मामले में जनवरी में एक FIR दर्ज की गई थी और मार्च में कुछ और धाराएं जोड़ी गई थीं।

 

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