scriptBMC conducted sero survey of children between 4 to 18 years in Mumbai, | मुंबई में बीएमसी ने चार से 18 साल तक के बच्चों का कराया सीरो सर्वे, सामने आए चौंकाने वाले नतीजे | Patrika News

मुंबई में बीएमसी ने चार से 18 साल तक के बच्चों का कराया सीरो सर्वे, सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

locationनई दिल्लीPublished: Jun 30, 2021 07:08:29 am

Submitted by:

Ashutosh Pathak

बीएमसी ने हाल ही में एक सीरो सर्वे कराया है। इस सर्वे में जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक मुंबई के करीब 51 प्रतिशत बच्चों में एंटीबॉडी पाई गई है। हालांकि, बच्चों में एंटीबॉडी कैसे विकसित हुई, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है।

 

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नई दिल्ली।

कोरोना वायरस (Coronavirus) की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार मुंबई समेत पूरे राज्य में अभी से सतर्कता बरतने का आदेश जारी कर चुकी है। सरकार ने तमाम विभागों को इससे संबंधित खास इंतजाम करने के निर्देश भी जारी किए हैं। वहीं, बीएमसी की ओर से कराए गए सीरो सर्वे में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है।
बीएमसी ने हाल ही में एक सीरो सर्वे कराया है। इस सर्वे में जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक मुंबई के करीब 51 प्रतिशत बच्चों में एंटीबॉडी पाई गई है। हालांकि, बच्चों में एंटीबॉडी कैसे विकसित हुई, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। मगर बीएमसी का अनुमान है कि इन बच्चों में एंटीबॉडी या तो कोरोना काल में विकसित हुई है या फिर यह प्राकृतिक है।
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बीएमसी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गत एक अप्रैल से 15 जून के बीच मुंबई के 24 वार्डों से करीब दो हजार 176 बच्चों के नमूने लिए गए थे। प्रत्येक वार्ड से करीब 100 बच्चों का नमूना लिया गया था। इन नमूनों की जांच मुंबई के दो बड़े अस्पतालों (नायर अस्पताल और कस्तूरबा अस्पताल) में कराई गई। जांच में जो जानकारी सामने आई उसके अनुसार, मुंबई के करीब 51 प्रतिशत बच्चों में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। यह आंकड़ा सभी के लिए राहतभरा है। जिन बच्चों में एंटीबॉडी विकसित हुई है, उनको लेकर बीएमसी का मानना है कि तीसरी लहर में उन्हें कोरोना का खतरा कम होगा।
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यही नहीं, बीएमसी की ओर से जो नमूने लिए गए उसमें दस से 14 वर्ष की उम्र के करीब 53.43 प्रतिशत बच्चों में एंटीबॉडी मिली। वहीं, एक से चार साल की उम्र के बच्चों में करीब पचास प्रतिशत और पांच से नौ साल के बच्चों में 43.33 प्रतिशत और 15 से 18 साल के किशोरों में करीब 51 प्रतिशत में एंटीबॉडी मिली।

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