COVID-19 मरीजों पर भारी पड़ रहा इलाज का खर्च, मेट्रो शहरों में Hospital Bill 3-16 लाख रुपये

  • Delhi, Mumbai, Kolkata के निजी अस्पतालों में खर्च है भारी।
  • Coronavirus Testing, ICU, PPE Kit पड़ती है काफी महंगी।
  • Non-ICU में एक दिन का खर्च 14 हजार से 32 हजार तक पड़ता है।

नई दिल्ली। भले ही कोरोना वायरस के आम मरीजों ( coronavirus patients ) की तुलना में ऐसे मरीजों की तादाद काफी कम हो सकती है जिन्हें इलाज की जरूरत हो, लेकिन इस बीच एक चिंता बढ़ती जा रही है। वो चिंता है लॉकडाउन ( Covid-19 Lockdown in India ) के दौरान पसरे आर्थिक संकट और इलाज के दौरान अनिश्चितता के बीच निजी अस्पताल के भारी-भरकम बिल ( Corona patients hospital bill ) की।

पिछले सप्ताह तक COVID-19 के एक्टिव केस ( Active Cases ) में 15 प्रतिशत से कम को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत थी। अस्पताल में भर्ती मरीजों में से सिर्फ 2.25 फीसदी प्रतिशत को ही गहन देखभाल इकाई ( ICU ) में भर्ती किए जाने की जरूरत थी, जबकि 1.91 प्रतिशत को ऑक्सीजन की और महज 0.004 फीसदी को वेंटिलेटर की जरूरत थी। लेकिन जैसे-जैसे शहरों में और विशेषकर हॉटस्पॉट्स ( Corona Hotspot ) में कोरोना वायरस केस बढ़े, निजी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई।

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इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के प्रमुख निजी अस्पतालों की श्रृंखलाओं में भर्ती किए गए छह कोरोना वायरस रोगियों के विस्तृत बिलों की जांच की। इस जांच में प्रमुख रूप से दो हैरान कर देने वाली बातें सामने आईं। पहली तो कोरोना वायरस के साथ कोई और बीमारी होने पर अस्पतालों ने भारी-भरकम बिल जारी कर दिए और, दूसरा कोई विशिष्ट इलाज या दवा उपलब्ध ना होने से दवाओं की लागत और कर्मचारियों की पीपीई ( PPE ) बिल बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती नजर आई।

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इस दौरान छह दिनों के इलाज के लिए बिल 2.6 लाख रुपये से लेकर लगभग एक महीने के लिए 16.14 लाख रुपये तक के देखने को मिले। इन सभी मामलों में एक को छोड़कर बाकी सभी मरीज ठीक हो गए। इनमें अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दो रोगियों के पास बीमा कवरेज ( Mediclaim ) नहीं था और शेष चार की बीमा कंपनियों ने अस्पताल के पूरे बिल को कवर नहीं किया। मरीजों को 60,000 से लेकर 1.38 लाख रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़े। इन सभी बिलों में औसतन 4500 रुपये का COVID-19 जांच के लिए RT-PCR टेस्ट एक छोटा सा ही हिस्सा है।

उदाहरण के रूप में 30 से कम उम्र वाले एक मरीज को दिल्ली के एक COVID-19 ICU में भर्ती कराया गया, जिसमें उसकी रोजाना दवा की कीमत महज 1,342 रुपये थी। वहीं, 60 साल से कम उम्र वाले एक व्यक्ति को दवाओं पर रोजोना 13,000 रुपये खर्च करने पड़े। हैरानी वाली बात है कि इस रोगी को COVID-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही एक प्रायोगिक दवा ( सटीक नहीं ) टोसीलीज़ुमाब ( Tocilixumab ) के लिए 40,548 रुपये का भुगतान करना पड़ा।

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इन बिलों का आंकलन करने से सामने आने वाले प्रमुख निष्कर्ष कुछ इस तरह के हैं:

  • दिल्ली में डॉक्टरों की टीमों के प्रति दिन परामर्श ( consultation fee of doctors ) की लागत 3800 से 7,700 रुपये तक होगी। हालांकि, कोलकाता और मुंबई में यही 2000-3000 रुपये के बीच है।
  • एक कोरोना पॉजिटिव मरीज़ के लिए प्रतिदिन के इलाज की लागत गैर-आईसीयू में 14,000 से 32,000 रुपये तक पड़ती है। 10 दिन रुकने पर यह बिल 3.2 लाख रुपये तक पहुंच सकता है और इस गैर-आईसीयू बिल में सबसे बड़ा हिस्सा कमरे का किराया और वार्ड में इस्तेमाल की जाने वाली रोजमर्रा की चीजें होती हैं।
  • ऐसे मरीज जो गंभीर नहीं हैं, उनके लिए एक कमरे की लागत प्रतिदिन 3200 रुपये से शुरू होकर एक डीलक्स कमरे के लिए 16,000 रुपये प्रतिदिन तक पहुंचती है। प्रतिदिन इस्तेमाल की जाने वाली उपभोग्य सामग्रियों ( consumable ) की का खर्च 4000 से लेकर 8000 रुपये तक पड़ता है। प्रतिदिन औसतन तीन से पांच पीपीई किट का उपयोग किया जाता है, और प्रतिकिट की कीमत 700 से 1100 रुपये तक होती है।
  • बिल का एक प्रमुख हिस्सा COVID-19 जांच है। गंभीर संक्रमण की जांच के लिए procalcitonin test और इम्यूनोडिफ़िशिएंसी डिसऑर्डर की जांच के लिए Interleukin-6 test की कीमत 9,000 रुपये हो सकती है।
  • गैर-आईसीयू में डॉक्टर की प्रतिदिन कंसल्टेशन फीस 2100 से लेकर 3800 रुपये तक और प्रतिदिन दवाओं की कीमत 300 से 1000 रुपये पड़ती है। आईसीयू में मरीज को भेजे जाने पर इनमें से ज्यादातर की कीमत दोगुनी हो जाती है।
  • ICU का एक दिन का किराया 7000 से लेकर 16000 रुपये तक होता है। वहीं, मरीज रोजाना 1000 से 2,500 रुपये के बीच वेंटिलेटर के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है।
  • आईसीयू में एक और बड़ा खर्च धमनी रक्त गैस ( Arterial Blood Gas ) का होता है, जो रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को मापने की एक प्रक्रिया है। इसका खर्च 1000 से लेकर 5500 रुपये प्रतिदिन तक पड़ता है।
  • आईसीयू में रोजाना कंसल्टेशन का खर्च 2500 से 6000 रुपये तक है, और यह रकम इंटर्नल मेडिसिन, क्रिटिकल केयर और चेस्ट मेडिसिन के डॉक्टरों द्वारा विजिटिंग चार्ज के रूप में अलग से ली जाती है।
  • गंभीर इलाज की जरूरत वाले मरीजों को COVID-19 प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। जो 2000 से 5000 रुपये प्रति प्रक्रिया होती है। इसके अलावा वेंटिलेटर की निगरानी के लिए रोजाना 1,500 रुपये तक डॉक्टर का शुल्क अलग से लगता है।
  • आईसीयू में consumable और जांच की लागत भी एक गैर-आईसीयू की तुलना में लगभग दोगुनी होती है। रोजाना की जांच लागत 7000 से शुरू होकर काफी गंभीर रोगियों में 20000 रुपये तक जा सकती है। कुछ बिलों से पता चलता है कि आईसीयू के मरीज को "बायो फायर रेस्पिरेटरी पैनल टेस्ट" के लिए 18,000 रुपये तक का भुगतान करना पड़ता था।
  • Consumables में ICU में प्रतिदिन का खर्च 10,000-13,000 रुपये तक आता है जबकि अकेले पीपीई की प्रतिदिन की लागत 6,000 से 10,000 रुपये तक है।
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अमित कुमार बाजपेयी
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