उत्तराखंड में पहली बार प्लाज्मा थेरेपी का आया रिजल्ट, स्वस्थ हुए Corona मरीजों ने डॉक्टर का किया धन्यवाद

Highlights
- राज्य में पहली बार कोरोना मरीजों (Corona Patients) में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma therapy) के अच्छे रिजल्ट निकल कर आए हैं
- हल्द्वानी (Haldwani) के सुशीला तिवारी अस्पताल (Sushila Tiwari Hospital) में भर्ती दो मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) के जरिए ठीक होने के बाद मंगलवार को यहां से डिस्चार्ज कर दिया गया
- डिस्चार्ज होने के बाद दोनों मरीजों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का शुक्रिया अता किया

नई दिल्ली. उत्तराखंड (Uttarakhand) में कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर जारी है। मंगलवार को प्रदेश में 208 नए मरीज मिले (Uttarakhand Update) और कुल आंकड़ा आठ हजार के पार पहुंच गया। वहीं किसके बीच राहत देने वाली खबर भी आई है। एक दिन में रिकॉर्ड 309 लोग स्वस्थ हुए हैं।

इससे पहले आठ जून को एक दिन में 186 मरीज ठीक हुए थे। राज्य का रिकवरी रेट भी अब 60 फीसद से ऊपर पहुंच गया है। मंगलवार को डिस्चार्ज किए गए मरीजों में 125 हरिद्वार, 99 ऊधमसिंह नगर, 55 देहरादून, 11 उत्तरकाशी, नौ टिहरी, पांच नैनीताल (Nainital), तीन चंपावत (Champawat) व दो रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) से हैं।

पहली बार हुए प्लाज्मा थेरेपी

वहीं एक और अच्छी खबर यह है कि राज्य में पहली बार कोरोना मरीजों (Corona Patients) में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma therapy) के अच्छे रिजल्ट निकल कर आए हैं। हल्द्वानी (Haldwani) के सुशीला तिवारी अस्पताल (Sushila Tiwari Hospital) में भर्ती दो मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) के जरिए ठीक होने के बाद मंगलवार को यहां से डिस्चार्ज कर दिया गया।

डिस्चार्ज होने के बाद दोनों मरीजों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का शुक्रिया अता किया। इलाज के दौरान इन दोनों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी जिसके बाद इन्हें आईसीयू और फिर वेंटीलेटर (Ventilator) पर रखना पड़ा था।

मरीजों में थे गंभीर निमोनिया के लक्षण

जानकारी के मुताबिक कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्वस्थ होकर निकलने वाले प्रकाश मेहरा और राजेंद्र नाम के दोनों मरीजों में एक उत्तराखंड पुलिस के सब-इंस्पेक्टर हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में कोरोना के नोडल अफसर डॉ. परमजीत सिंह के मुताबिक दोनों मरीजों में गंभीर निमोनिया के लक्षण थे। इसके अलावा उनका ब्लड प्रेशर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा था। साथ ही फेफड़ों में भी गंभीर संक्रमण था। जिससे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जिसके चलते प्लाज्मा थेरेपी का निर्णय लेना पड़ा।

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Ruchi Sharma
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