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एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठनों का ‘प्रतिरोध दिवस’

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ आज दलित संगठन 'प्रतिरोध दिवस' मना रहे हैं।

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के बाद शुरू हुआ दलित संगठनों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस (NDMJ) के महासचिव डॉक्टर वी ए रमन नाथन ने पूरे देश में दलितों का प्रतिरोध दिवस मनाने का आह्वान किया है। बता दें कि हाल में सुप्रीम कोर्ट ने दलित कानून (एससी/एसटी एक्ट) पर एक अहम फैसला सुनाते हुए मनमानी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

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दलित संगठनों का आरोप, कुछ नहीं कर रही सरकार

रमन नाथन ने दलितों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की अपील की है। दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के बैनर तले 1 मई को सभी जिला और प्रदेश मुख्यालयों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है। दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के कार्यकर्ता दलित एक्ट में बदलाव के खिलाफ आज जगह-जगह प्रदर्शन कर विरोध जताएंगे। एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन में देश भर के कई दलित संगठन शामिल होने जा रहे हैं। इस फैसले के खिलाफ देशभर के दलित 1 मई को लामबंद होंगे और जगह-जगह प्रदर्शन कर विरोध जताएंगे।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉक्टर नाथन ने कहा कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी मनाया जाता है इसीलिए इस दिन को चुना गया है। उन्होंने कहा कि भारत के मजदूरों का अधिकांश हिस्सा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आता है। सबसे मेहनतकश होने के बाद भी दलित सबसे ज्यादा भेदभाव के शिकार हैं। उन्हें कदम कदम पर भेदभाव और शोषण झेलना पड़ता है। बता दें कि इससे पहले दलितों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया था।

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सरकार से 12 मांगें

दलितों के नेशनल कोलिशन ने सरकार के सामने 12 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के संशोधन के बाद भारत सरकार से जरुरी कदम उठकर पहले वाली स्थिति बहाल करने की मांग सबसे प्रमुख मांग है। संगठन की मांग है कि इस एक्ट में स्थिति वही रहे जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले थी। साथ ही इसमें संसद या कोर्ट का कोई दखल न हो। इसके अलावा संगठन ने देश भर में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए गंभीर प्रयास करने की मांग की है।

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