
भारत में लॉकडाउन नहीं होता तो अब तक 10 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके होते- नीति आयोग
नई दिल्ली। पोस्ट कोविड से जीवनशैली में बड़ा बदलाव दिखने वाला है। महामारी के बाद देश के सामने कई सारी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। देश को इस विकट संकट से बाहर निकालने और इस दौरान सरकार द्वारा किए गए इंतजाम को लेकर नीति आयोग ने खांका तैयार किया है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी CEO अमिताभ कांत ने इस महामारी से अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने के लिए पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए पहली बार पत्रिका के साथ पूरी जानकारी साझा की।
पत्रिका कीनोट सलोन में सोमवार को अमिताभ कांत ने बताया कि इस बीमारी से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने समय रहते सख्त कदम उठाए जिससे भारत में बाकी देशों के मुकाबले मौत का आंकड़ा कम रहा। उन्होंने कहा कि दुनिया में जितनी मौतें हुई है उसमें भारत सबसे कम पर है। अमरीकी में मौत का आंकड़ा 68 हजार के पार है। जबकि भारत में 1395 लोगों की जान गई है। यानी 0.6 फीसदी लोगों की मौत यहां पर हुई है।
अमिताभ कांत ने बताया कि ऑक्सफोर्ड की स्टडी ने माना कि इंडिया में महामारी को लेकर सरकार ने गंभीरता बरती। जबकि अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। जिससे यह महामारी वैश्विक स्तर पर ज्यादा फैली। अमिताभ कांत ने बताया कि अगर भारत में लॉकडाउन नहीं होता तो 10 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके होते। सरकार ने तत्परता दिखाते हुए देशभर में लॉकडाउन लागू किया और महामारी रोकने में धीरे-धीरे सफलता मिल रही।
Updated on:
5 May 2020, 4:44 PM IST
Published on:
5 May 2020, 3:51 PM IST
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