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‘नेशनल मेडिकल काउंसिल’ पर अध्यादेश से भड़का आईएमए- यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ

'सरकार ने पूरी चिकित्सा बिरादरी के विरोध को अनदेखा करते हुए यह अध्यादेश जारी किया है और ऐसा किया जाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर हमला है। यही नहीं सरकार ने ऐसे विवादास्पद विधेयक के मामले में संसद की अवहेलना की।'
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नई दिल्ली

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Pritesh Gupta

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Updated: 26 Sep 2018, 7:17 PM IST

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'नेशनल मेडिकल काउंसिल' पर अध्यादेश से भड़का आईएमए- यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ

नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) विधेयक को गरीब विरोधी बताया है। साथ ही इसे देश के संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए अध्यादेश के जरिये लाए जाने के सरकार के कदम की भी निंदा की है। उल्लेखनीय है कि मोदी कैबिनेट ने बुधवार को ही एनएमसी को मंजूरी दी है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ रवि वानखेड़कर ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा है, 'सरकार ने पूरी चिकित्सा बिरादरी के विरोध को अनदेखा करते हुए यह अध्यादेश जारी किया है और ऐसा किया जाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर हमला है। यही नहीं सरकार ने ऐसे विवादास्पद विधेयक के मामले में संसद की अवहेलना की।'

'यह चिकित्सा शिक्षा निजी लॉबी को सौंपने वाला कदम'

उन्होंने कहा कि देश के 300 से अधिक निजी मेडिकल कॉलेजों में 40 फीसदी प्रबंधन कोटा जैसे जनहित के मुख्य मुद्दे हैं और समाज के सभी वर्गों को इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा है, 'चिकित्सा शिक्षा को शक्तिशाली निजी मेडिकल कॉलेजों की लॉबी के हाथों पूरी तरह बेचने के इस कदम का आईएमए पूरी शक्ति के साथ विरोध करेगा। आईएमए का यह भी मानना है कि इस अध्यादेश के जरिये न केवल राज्य सरकारों, राज्य मेडिकल परिषदों और विश्वविद्यालयों की अनदेखी की गई है, बल्कि प्रत्येक चिकित्सक के मतदान के अधिकार को भी छीन लिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने किस तरह से देश के चिकित्सकों की सहमति के बिना ही चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा पेशे को प्रतिबंधित करने का विचार किया।'

28 सितंबर को होगी आईएमए की बैठक

बयान के अनुसार, आईएमए ने 28 सितंबर 2018 को मुंबई में सभी राज्यों के आईएमए के अध्यक्षों एवं सचिवों की बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की कार्रवाई की दशा-दिशा तय की जाएगी। सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सरकार के साथ पूर्ण असहयोग किया जा रहा है। आईएमए अध्यादेश के जरिये एनएमसी को लागू करने के फैसले के लिए सरकार ने चिकित्सकों की आवाज के साथ-साथ संसदीय समिति की राय अनदेखी करके अपनी असंवेदनशीलता का परिचय दिया है, जिसकी आईएमए निंदा करता है। आईएमए सरकार को चेतावनी देता है कि प्रबंधन समर्थक और गरीब विरोधी एनएमसी अध्यादेश का जोरदार विरोध किया जाएगा और इस मामले को जनता की अदालत में ले जाया जाएगा।'