दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान! रेलवे ट्रैक पर बसे 48 हजार झुग्गीवालों को दिलाए जाएंगे पक्के मकान

  • Slum Dwellers In Delhi Railway Track : 5 किलोमीटर के दायरे के अंदर झुग्गीवालों को मुहैया कराया जाएगा घर
  • झुग्गियां हटाए जाने से पहले उनके रहने का इंतजाम करने में जुटी केजरीवाल सरकार

By: Soma Roy

Published: 15 Sep 2020, 12:00 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना के चलते देश भर में हुए लॉकडाउन (Lockdown) से कई श्रमिक एवं रोजमर्रा का काम करने वाले लोग बेरोजगार हो गए हैं। उनके सिर पर न तो छत है और न ही पैसा। ऐसे में उन्होंने दिल्ली के रेलवे ट्रैक (Delhi Railway Track) के किनारे ही अपना आशियाना बना लिया है। इसे प्रशासन हटाने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय लोगों के विरोध से हंगामा ज्यादा बढ़ गया। लिहाजा मामला हाईकोर्ट जा पहुंचा। इतनी बड़ी तादाद में लोग कहां और कैसे जाएं ये एक बड़ी चिंता है। इसी बीच केजरीवाल सरकार ने झुग्गीवालों (Slum Dwellers) को राहत देते हुए बड़ा ऐलान किया है। उनका कहना है कि जगह खाली कराए जाने से पहले उनके रहने के लिए पक्के मकान मुहैया कराए जाएंगे। अच्छी बात यह है कि ये सभी मकान 5 किमी की दूरी के अंदर ही होंगे।

मालूम हो कि 31 अगस्त को एक फैसले में शीर्ष अदालत ने दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे बसीं 48,000 झुग्गियों को तीन महीने के अंदर हटाने का निर्देश दिया था। इस मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान काफी बहस भी हुई थी। ऐसे में केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा था। सरकार ने भरोसा दिलाया था कि झुग्गीवालों को पक्का घर दिलाया जाएगा। ये उनका हक है। अब इसी सिलसिले में केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) के ऐलान से लोगों को राहत मिली है। केजरीवाल का कहना है कि महामारी के इस दौर में 48,000 झुग्गियों को हटाना सही नहीं है। क्योंकि इससे कोरोना वायरस हॉटस्पॉट बनने का खतरा हो सकता है। इसलिए उनके पुनर्वास की व्यवस्था पहले करनी होगी। हर झुग्गी वाले का यह कानूनी अधिकार है कि उसका एक घर हो।

बता दें कि रेलवे ट्रैक के पास बनी झुग्गियों को खाली कराने के लिए प्रशासन पर जबरदस्ती करने का आरोप है। लोगों का कहना है कि वे जबरन झुग्गियां तोड़ रहे हैं, जबकि मामला पहले से ही कोर्ट में है। दिल्ली के यमुना बैंक मेट्रो के पास यमुना खादर इलाके में रविवार को प्रशासन की ओर से सैकड़ों झुग्गियां तोड़े जाने की खबर सामने आई थी। इस मामले में वन विभाग ने सफाई दी थी कि डीडीए ने यह ज़मीन वन विभाग को दी है। यहां पेड़ पौधे लगाए जाएंगे।

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