यह 7 सवाल छोड़ गया फारूक अब्दुल्ला के घर में मारा गया युवक मुर्फाद शाह

यह 7 सवाल छोड़ गया फारूक अब्दुल्ला के घर में मारा गया युवक मुर्फाद शाह

जम्मू स्थित डॉ. फारूक अब्दुल्ला के घर में कथितरूप से जबरन घुसने वाले 26 वर्षीय मुर्फाद शाह की हत्या कई सवाल खड़े कर रही है। जानिए बड़े प्रश्न।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और श्रीनगर के सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला के भठिंडी स्थित आवास पर शनिवार सुबह एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत वहां तैनात सुरक्षाबलों की गोली से हो गई। 26 वर्षीय मुर्फाद शाह पर आरोप था कि उसने जबरन अब्दुल्ला के घर घुसने का प्रयास किया और अपनी एक्सयूवी 500 लेकर गेट से टकराते हुए सीधे अंदर पहुंच गया। उसे रोकने का प्रयास किया गया लेकिन वो हाथापाई पर उतर आया और इस दौरान उसे गोली मार दी गई। हालांकि मुर्फाद या उसकी एसयूवी से कोई असलाह या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ। पुलिस-सुरक्षाबलों की यह थ्योरी मुर्फाद की मौत पर कई बड़े सवाल खड़े करती है।

जानिए पुलिस-सुरक्षा बलों का बयान

सबसे पहले तो जान लीजिए पुलिस का बयान। जम्मू के पुलिस अधीक्षक डॉ. विवेक गुप्ता के मुताबिक शनिवार सुबह मुर्फाद शाह (26) नामक युवक 10:13 बजे तेज रफ्तार एक्सयूवी में सवार होकर आया और उसकी गाड़ी डॉ. फारूक अब्दुल्ला के घर के दरवाजे से जा टकराई। इसके बाद युवक ने उनके घर में घुसने का जबरन प्रयास किया और चेतावनी दिए जाने पर भी जब उसने सुरक्षाबलों की बात न मानी तो वहां तैनात जवानों ने उस पर गोली चलाई और उसकी मौत हो गई।

 

वहीं, केंद्रीय सुरक्षा बल द्वारा जारी बयान के मुताबिक चिनौर निवासी मुर्फाद शाह ने जब पूर्व सीएम के आवास के भीतर दाखिल होना की कोशिश की तो उसकी गाड़ी सीधे गेट से टकराते हुए अंदर घुस गई। वो कार का दरवाजा खोलकर सीधे अंदर कमरे की ओर भागा। इसके बाद सीढ़ियों के नजदीक उसे रोकने की कोशिश की गई तो उसने हाथापाई की। इस दौरान एक जवान को चोट भी आई। फिर उस पर गोली चलाई गई जिसमें उसकी जान चली गई।

यहां एक बात दिलचस्प है कि सुरक्षाबलों ने जिस सुरक्षा की वजह से गोली मारी थी, उस दौरान आवास में न तो डॉ. अब्दुल्ला थे और न ही उनके बेटे ओमर अब्दुल्ला।

कौन था मुर्फाद शाह?

मुर्फाद शाह के परिजन पुंछ जिले में मौजूद मेंधड़ तहसील के निवासी हैं। तकरीबन 1990 में यह परिवार जम्मू आकर रहने लगा था। मुर्फाद के पिता स्टेट फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन में काम करते हैं। मुर्फाद ग्रेजुएशन कर रहा था और दूसरे वर्ष में था। पढ़ाई के अलावा वो सुबह नमाज पढ़ने के बाद जिम जाता था। अपने पारिवारिक काम में भी हाथ बंटाता था। परिवार के लोग बंदूक बेचने का काम करते हैं, जिसमें मुर्फाद भी मदद करता था।

मुर्फाद की मौत से जुड़े 7 बड़े सवाल?

  1. परिजनों का कहना है कि अगर केंद्रीय सुरक्षाबल के अफसरों का बयान ही मानें तो जब मुर्फाद अपनी गाड़ी को तेजी से लेकर डॉ. अब्दुल्ला के दरवाजे से टकराया तो गाड़ी के अंदर लगा एयरबैग क्यों नहीं खुला?
  2. इतनी बड़ी गाड़ी अगर तेज रफ्तार में इतने बड़े दरवाजे से टकराई तो उस पर कोई भी डेंट क्यों नहीं पड़ा?
  3. करीब 15 फुट ऊंचे मेन गेट में इतनी तेज टक्कर के बावजूद क्यों गाड़ी का एक भी शीशा, हेडलाइट नहीं टूटी?
  4. अगर मुर्फाद निहत्था था तो सुरक्षाबल उसे क्यों काबू नहीं कर सके, कई सुरक्षाबल के जवान मिलकर तो आसानी से उसे कब्जे में ले सकते थे।
  5. जब उसके पास कोई हथियार-रॉड-चाकू आदि नहीं था तो क्यों उसके सीने पर गोली मारी गई?
  6. क्यों सुरक्षाबलों ने उसकी जान ले ली क्योंकि अगर उन्हें कुछ खतरा-संदिग्ध नजर आ रहा था तो उसे पकड़कर पूछताछ की जा सकती थी।
  7. कैसे जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी वाले डॉ. अब्दुल्ला के घर के मेन गेट से 100 मीटर भीतर मुर्फाद घर की लॉबी तक पहुंच गया?
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