सुप्रीम कोर्ट के चार वर्तमान जजों के बाद चार पूर्व जजों ने रोस्टर प्रक्रिया पर उठाया सवाल

Mazkoor Alam

Publish: Jan, 14 2018 08:41:25 PM (IST)

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सुप्रीम कोर्ट के चार वर्तमान जजों के बाद चार पूर्व जजों ने रोस्टर प्रक्रिया पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट के चार वर्तमान जजों के बाद चार पूर्व जजों ने रोस्टर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट चार जज जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट विवाद में कुछ पूर्व जजों का भी साथ मिलता दिख रहा है। उन्होंने भी रविवार को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों द्वारा उठाए गए मुद्दे के समर्थन में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र को एक खुला पत्र लिखकर कहा है कि मुख्य न्यायधीश के विशेषाधिकार को अधिक पारदर्शी बनाए जाने की जरूरत है। ये खुला पत्र सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पी बी सावंत, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज के चंद्रू और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज एच सुरेश ने लिखा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने शुक्रवार को को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ गंभीर सवाल उठाए थे। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

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ये है चार पूर्व जजों का खुला पत्र

डियर मुख्य न्यायधीश,
सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न बेंचों को केसों, विशेषत: संवेदनशील केसों, के आवंटन के तरीकों पर गंभीर मुद्दा सामने लेकर आए हैं। उनके अनुसार, केस सही तरीके से आवंटित नहीं किए जा रहे हैं और मनमाने तरीके से उन्हें खास बेंचों को दिया जा रहा है। कई बार ये जूनियर जजों की अगुवाई वाली बेंचों को दिए जाते हैं। इसका न्याय के प्रशासन और कानून के राज पर गहरा असर पड़ रहा है। उन चार जजों से हम सहमत हैं कि चीफ जस्टिस का ही अधिकार है कि वह रोस्टर तय करे और काम के आवंटन के लिए वह बेंच तय कर सकते हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि कि यह मनमाने तरीके से किया जाए। जैसे संवेदनशील और अहम केसों को चीफ जस्टिस जूनियर जजों की चुनिंदा बेंचों को सौंप दें। इस मुद्दे का निस्तारण आवश्यक है। बेंचों के निर्धारण और केसों को सौंपे जाने के लिए ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जो तर्कसंगत, निष्पक्ष और पारदर्शी हों। अदालत में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसा तुरंत किया जाना चाहिए। ऐसा होने तक ये जरूरी है कि सभी अहम व संवेदनशील के साथ लंबित मामले भी शामिल हैं, उसे कोर्ट की पांच वरिष्ठतम जजों वाली संवैधानिक पीठ देखे। इस तरह के उपायों से ही अदालत पर लोगों का विश्वास बन सकता है कि सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है। रोस्टरकर्ता के रूप में चीफ जस्टिस की शक्तियों का अहम और संवेदनशील मामलों में विशेष परिणाम के लिए दुरुपयोग नहीं हो रहा है। इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस संदर्भ में तुरंत कदम उठाएं।

हस्ताक्षरित

जस्टिस पीबी सावंत, पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
जस्टिस एपी शाह, पूर्व चीफ जस्टिस, दिल्ली हाई कोर्ट
जस्टिस के चंद्रू, पूर्व जज, मद्रास हाई कोर्ट
जस्टिस एच सुरेश, पूर्व जज, बॉम्बे हाई कोर्ट

 

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