Exclusive : मुख्यमंत्री ममता के साथ किस मोड़ पर आ गए हैं राजभवन के रिश्ते

  • राज्यपाल बोले, न मैंने लक्ष्मण रेखा पार की है और न ही करने दूंगा
  • रिश्ते सुधारने पर बोले, रिश्तों की दूरियों पर जमी बर्फ पिघल रही है

नई दिल्ली.
पश्चिम बंगाल में राजभवन और मुख्यमंत्री के बीच में चल रही रस्साकसी फिलहाल तो खत्म होती हुई दिखाई नहीें दे रही है। जिस तरह से मुख्यमंत्री ने राजभवन से दूरी बनाई है और राज्यपाल से मुलाकात करना तक जरूरी नहीं समझा है। वहीं, राज्यपाल सरकार की कमियों को सार्वजनिक कर उन तल्खियों को और ज्यादा बढ़ाने में लगे हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि दोनों ओर से रिश्तों को बेहतर करने की कोई पहल दिखाई नहीं दे रही है। अब जबकि मुख्यमंत्री अपना एक मोर्चा खोल चुकी हैं तो राज्यपाल फिर भी उम्मीद से हैं कि आने वाले दिनों में रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलेगी और वापस प्रदेश के भले के लिए दोनों मिलकर काम करेंगे।


उन्होंने कहा कि जिस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठकर उनकी बात सुन लेंगी, वह राजभवन के साथ मिलकर काम करना शुरू कर देंगी। अभी वह किसी की स्क्रिप्ट से चल रही हैं, जो उन्हें राजभवन से लड़ाकर उनका फायदा दिखाना चाहता है। लेकिन मुझे उम्मीद ही नहीं भरोसा है कि एक दिन वह खुद आएंगी और यह रिश्ते सुधरते हुए दिखाई देंगे।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब देते हुए कहा, मैंने दस महीने के कार्यकाल में कभी संविधान की लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघा है, लेकिन इसका भी भरोसा दिलाता हूं कि किसी को लांघने भी नहीं दूंगा। मेरा काम संविधान की रक्षा करना है और मुख्यमंत्री का काम संविधान का पालन करना। अगर प्रदेश की मुख्यमंत्री केंद्र के किसी कानून के प्रति धरना देने जाएंगी तो मैं उन्हें रोकूंगा, क्योंकि संवैधानिक तौर पर वह ऐसा नहीं कर सकती हैं। मेरा हर काम जनता की भलाई के लिए है। मेरा काम सरकार को उसकी कमियों के बारे में चेताना है और बताना है। मैं यह काम करता रहूंगा। अगर मैं राजभवन में बैठकर प्रजातंत्र के मूल तत्व को खत्म हो जाने दू्गा तो फिर मेरा राजभवन में होने का क्या मतलब।

सरकार अलग होंगी तो राज्यपाल संदेह में रहेंगे
राज्यपाल की भूमिका के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो मेरी स्थिति है वह दूसरे राज्यपालों के सामने भी आती है। जब केंद्र में एक दल की सरकार होती है और राज्य में दूसरी पार्टी की तो तो राज्यपाल को शक की निगाह से देखा जाता है। माना जाता है कि राज्यपाल अपना एजेंडा लेकर आया है। केंद्र सरकार के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है, लेकिन मेरा पहला काम है कि राज्य की सरकार के साथ मजबूती से खड़ा होना और जनता की भलाई के लिए काम करना। मेरा पहला प्रयास ही यही है कि मैं राज्य और केंद्र के बीच टकराव को कम करूं।

अगर गड़बड़ी सामने है तो कैसे चुप हो जाएं
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार केंद्र से लगातार टकराव बढ़ा रही हैं, हो सकता है कि ममता बनर्जी की राजनीतिक विवशता हो। लेकिन मेरी भूमिका सकारात्मक है। मेरा टकराव राज्य सरकार से नहीं है, राज्य सरकार का टकराव मेरे से है। आप एक भी उदाहरण नहीं दे सकते, जिसमें कहा जा सके कि मेरा एक भी फैसला राज्य सरकार के खिलाफ हो। हां, एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि अगर संविधान गड़बड़ होता रहे और राज्यपाल चुप हो जाए, यह संभव नहीं होगा।

कोविड को संभालने में कमजोर रही सरकार
राज्यपाल ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि कोविड को संभालने में सरकार की तैयारी कमजोर दिखाई दी है। उन्होंने साफ कहा कि कोविड को लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से भी बातचीत की, लेकिन उसका कोई हल नहीं निकला। राज्य सरकार आंकड़ों को स्पष्ट नहीं कर रही है। मैंने चिट्ठी लिखकर कुछ जानकारी चाही गई, लेकिन उसका जवाब चिट्ठी से मिला। लेकिन जो पूछा गया था, उसकी जानकारी नहीं आई। एक जून से लगातार कोविड के नंबर बढ़ रहे हैं। दबाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि सरकार को बताना चाहिए। जिससे लोग असल हकीकत जान सकें। मेरा काम सरकार को आगाह करना है, अगर मैं यह नहीं करूंगा तो फिर मैं न्याय नहीं करूंगा।

चुनाव बिना हिंसा के हों यह मेरी जिम्मेदारी
राज्यपाल ने कहा कि मैंने सरकार और सरकारी सिस्टम को पूरी तरह से साफ कर दिया है कि राज्य में चुनाव बिना हिंसा के होने चाहिए। यह मेरी जिम्मेदारी है कि राज्य में साफ और स्वच्छ तरीके से चुनाव हों। मेरी जिम्मेदारी है कि दूसरी पार्टियों के नेताओं को भी अपनी राजनीतिक गतिविधि का पूरा अधिकार मिले। कोविड के नाम पर सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले न थोपे जाएं। प्रवासी मजूदरों पर भी मैंने दखल दिया था। मैंने सरकार से कहा कि आप इन्हें कोविड कैरियर नहीं कह सकते हैं, उनके लिए इंतजाम होने की बात नहीं कर सकते हैं। हमें उनके साथ सामांजस्य बनाना होगा। यहां कोई कमी नहीं है, बस कुछ तरीके खराब हो गए हैं। अगर उसके लिए राज्यपाल दखल नहीं देगा तो गलत हो जाएगा।

प्रदेश भ्रष्टाचार की चपेट में, खामोश है सरकार
राज्यपाल ने अपनी ही सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि
मैं तो यही अपील कर सकता हूं कि कोविड और तूफान में राजनीतिक डीएनए को अलग करके देखिए। राज्य में सरकारी तंत्र को काम करने दीजिए। पीडीएस सिस्टम अगर टीएमसी के कार्यकर्ता संभालेंगे तो फिर सरकारी तंत्र क्या करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रही है। अफसर विपक्ष पर निशाना साधते हैं। यह ठीक नहीं है और राज्यपाल होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि मैं सच को सच कहूं।

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