रिपोर्ट: सैनिकों ने जुनून में 39 अफगानियों की क्रूर हत्या कर दी

Highlights.

- विशेष सुरक्षा बल के करीब डेढ़ दर्जन जवानों ने हत्याओं को दिया अंजाम

- अफगान लोगों की हत्‍या की जांच वर्ष 2016 में शुरू हुई थी, र‍िपोर्ट हाल ही में जारी हुई

- रिपोर्ट के मुताबिक, निहत्थे पुरुषों और बच्चों की कथित हत्या की चर्चा के बाद ऑस्ट्रेलिया में 2016 में जांच शुरू हुई थी

नई दिल्ली.

ऑस्‍ट्रेल‍िया में विशेष सुरक्षा बल के करीब डेढ़ दर्जन जवानों ने अफगानिस्‍तान के 39 लोगों की गैरकानूनी तरीके से हत्‍या कर दी। अफगान लोगों की हत्‍या की जांच वर्ष 2016 में शुरू हुई थी। इसकी र‍िपोर्ट हाल ही में जारी हुई है।

युद्ध अपराधों से जुड़ी सैन्य रिपोर्ट पर गौर करें तो इसमें स्पष्ट कहा गया है कि इस बात की ‘पुख्ता जानकारी’ है कि ऑस्ट्रेलियाई विशेष सुरक्षा बलों के मौजूदा और रिटायर हो चुके करीब डेढ़ दर्जन सैनिकों ने कथित तौर पर 39 अफगानों की गैरकानूनी तरीके से हत्या की थी। एक्टिविस्टों की रिपोर्टों और मीडिया की खबरों की मानें तो अफगानिस्तान में निहत्थे पुरुषों और बच्चों की कथित हत्या की चर्चा के बाद ऑस्ट्रेलिया में 2016 में जांच शुरू की गई थी।

गुरुवार को जारी हुई यह रिपोर्ट

जस्टिस पॉल ब्रेरेटन के NSW कोर्ट ऑफ अपील ने अपनी 4 साल की जांच में पाया कि 23 घटनाओं की 'पुख्ता जानकारी' है। इनमें ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा बल के जवान गंभीर अपराधों में शामिल थे। वे या तो खुद अपराधों को अंजाम दे रहे थे या अपराधियों की इसमें मदद कर रहे थे।


सैनिकों ने क्रूर व्यवहार किया

रिपोर्ट के मुताबिक, 23 घटनाओं में ऑस्ट्रेलियाई विशेष सुरक्षा बलों के हाथों 39 अफगानों की कथित तौर पर हत्या की जानकारी है। इनमें से दो घटनाओं को 'क्रूर व्यवहार' के युद्ध अपराध के रूप में बांटा जा सकता है। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई विशेष सुरक्षा बल के प्रमुख जनरल एंगस कैंपबेल ने कहा कि शर्मनाक रिकॉर्ड में कई कथित उदाहरण शामिल हैं, जिनमें से गश्ती दल के नए सदस्यों ने पहली हत्या अंजाम देने के जुनून में किसी कैदी को गोली मार दी थी।

गलत कहानियां गढ़ते रहे सैनिक

कैंपबेल ने कहा कि अपनी इन हरकतों को छिपाने के लिए सैनिक लगातार गलत कहानियां गढ़ते रहे और दावा करते रहे कि कैदी आपस में दुश्मन थे और आपसी कार्रवाई में मारे गए। कैंपबेल ने कहा कि गैरकानूनी तरीके से हत्या करने का सिलसिला 2009 में शुरू हुआ था, मगर वर्ष 2012 और 2013 में भी इस तरह की वारदातें सामने आईं।

Ashutosh Pathak
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