किसी कानून में नहीं लिखा कि महिला को शादी के बाद पति का ही धर्म अपनाना होगा: सुप्रीम कोर्ट

Pradeep kumar Pandey

Publish: Dec, 08 2017 10:45:53 (IST)

Miscellenous India
किसी कानून में नहीं लिखा कि महिला को शादी के बाद पति का ही धर्म अपनाना होगा: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा भारत का कोई कानून इस अवधारणा को मंजूरी नहीं देता कि अंतर-धार्मिक विवाह के बाद महिला का पति उसे पति के धर्म को अपनाने के लिए मजबूर करें

नई दिल्ली। शादी के बाद महिला के धर्म परिवर्तन को लेकर मच रहे बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि भारत का कोई भी कानून इस अवधारणा को मंजूरी नहीं देता कि अंतर-धार्मिक विवाह के बाद किसी महिला के पति या ससुराल वाले उसे पति के धर्म को अपनाने के लिए मजबूर करें। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला कथित लव जिहाद मामलों को लेकर अहम है। आपको बता दें कि इन दिनों केरल का हादिया केस कथित लव जिहाद की वजह से सुर्खियों में हैं, जहां शादी के बाद महिला ने हिंदू से मुस्लिम धर्म अपना लिया।

अन्य धर्म में शादी के बाद नहीं खो जाती पहचान
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अगुवाई वाली न्यायधीशों के संवैधानिक पीठ ने यह फैसला दिया। न्यायाधीशों की पीठ इस कानूनी सवाल को देख रही थी कि यदि कोई पारसी महिला किसी दूसरे धर्म के पुरुष से शादी कर लेती है तो क्या उसकी धार्मिक पहचान खत्म हो जाती है। पीठ में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण भी शामिल थे।

पीठ ने दिया पारसी ट्रस्ट को निर्देश
संविधान पीठ ने वलसाड पारसी ट्रस्ट की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम से कहा कि वह निर्देश लेकर उसको 14 दिसंबर को अवगत कराएं कि क्या इसके द्वारा हिन्दू व्यक्ति से शादी करने वाली पारसी महिला गुलरोख एम गुप्ता को उसके माता-पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

क्या है मामला
आपको बता दें कि गुप्ता ने गुजरात हाईकोर्ट की तरफ से साल 2010 में बरकरार रखे गए उस पारंपरिक कानून को चुनौती दी थी कि हिन्दू पुरुष से शादी करने वाली पारसी महिला पारसी समुदाय में अपनी धार्मिक पहचान खो देती है और इसलिए वह अपने पिता की मौत की स्थिति में ‘टॉवर ऑफ साइलेंस’ जाने का अधिकार खो देती है।

अलग धर्मों की शादी के बाद भी अलग हो सकते हैं धर्म
संविधान पीठ ने अपना फैसला सुनते हुए कहा, 'ऐसा कोई कानून नहीं है जो यह कहता हो कि महिला किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के बाद अपनी धार्मिक पहचान खो देती है'; उन्होंने आगे कहा कि ' इसके अतिरिक्त विशेष विवाह कानून है और अनुमति देता है कि दो व्यक्ति शादी कर सकते हैं और अपनी-अपनी धार्मिक पहचान बनाए रख सकते हैं।'

तलाक लेने के बाद पत्नी को मिले गुजारा भत्ता
वहीं एक दूसरे मामले में कोर्ट ने कहा कि कानूनी तौर पर अलग रह रही पत्नी भी गुजारा-भत्ता की हकदार है। उसे ऐसा करने से रोकने की कोई वजह नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तलाकशुदा पत्नी को गुजारा भत्ता दिया जा सकता है तो कानूनी तौर पर अलग हुए दंपति को क्यों नहीं।

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