90 करोड़ की लागत से बनेगा उसैद घाट पर पुल, भूमिपूजन हुआ

चंबल नदी के उसैदघाट पर पक्का पुल फरवरी 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। भारत सरकार में केबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 90 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित पुल निर्माण के लिए रविवार को हवन-पूजन और मां चंबल की आरती के साथ भूमि पूजन किया। उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राजा महेंद्र महेंद्र अरिदमन सिंह विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

By: Ravindra Kushwah

Updated: 01 Mar 2021, 12:00 PM IST

मुरैना/अंबाह. 700 मीटर लंबे और 12 मीटर चौड़े पुल की ऊंचाई 25 मीटर रहेगी। 50 मीटर गहरे कुएं खोदकर 14 स्पॉन तैयार किए जाएंगे। पुल निर्माण से मप्र में अंबाह तहसील के उसैद और उत्तरप्रदेश के पिनाहट घाट के माध्यम से सीधे सड़क संपर्क आगरा, मथुरा, दिल्ली, फिरोजाबाद के लिए हो जाएगा। इससे न केवल रिश्तेदारियों में लोगों का वर्ष भर निर्वाध आना-जाना हो सकेगा बल्कि व्यापारिक गतिवधियां बढऩे से क्षेत्र में समृद्धि आएगी। इस मौके पर पूर्व मंत्री मुंशीलाल, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. योगेशपाल गुप्ता, विधायक कमलेश जाटव, पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह तोमर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन गजेंद्र सिंह तोमर ने और आभार ग्रामीण मंडल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह तोमर ने जताया। उच्च स्तरीय पुल निर्माण को वर्ष 2012 से कवायद हो रही है। 2012 में इसकी प्रस्तावित लागत 28 करोड़ रुपए थी जो नौ साल में बढ़कर 90 करोड़ तक पहुंच गई है। 32वर्ष पूर्व यहां पुल निर्माण के लिए शिलान्यास पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था। तोमर ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री शिलान्यास करे और कार्य न हो पाए, यह तो हैरत की बात है। तोमर ने उप्र के पूर्व मंत्री और दिमनी से पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह के पुल निर्माण के लिए एनओसी के प्रयासों की सराहना की। तोमर ने कहा कि विभिन्न विभागों से एनओसी प्राप्त करने के लिए दोनों नेताओं ने पूरे मन से गंभीर प्रयास किए और इसकी वजह से पुल निर्माण की स्थिति में आया।
बचपन से देखी है पुल न होने से लोगों की परेशानी
पुल के लिए भूमि पूजन के बाद केंद्रीय मंत्री तोमर सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उसैदघाट पर पुल न होने से लोगों को होने वाली परेशानी बचापन से देखी है। मोमर ने कहा कि बचपन में परिजनों के साथ पिनाहट बाजार जाता था। पुल न होने से बड़ी परेशानी होती थी। जब राजनीतिक रूप से कुछ करने की स्थिति में आया तो इस दिशा में प्रयास किए। जानकारी ली तो पता चला कि पूर्व प्रधानमंत्री का शिलान्यास केवल चुनावी था। विभागीय स्तर पर इसकी कोई रूपरेखा नहीं थी शिलान्यास का पत्थर चुनावी फायदा के लिए लगा दिया था । वरना एक देश का प्रधानमंत्री किसी कार्य का शिलान्यस करे और काम न हो पाए, यह तो हैरत की बात है। हमने नए सिरे से कोशिश की और पुल का कार्य प्रारंभ कराया किंतु विभिन्न कारणों से इसमें विलंब हुआ जिसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ा है। तोमर ने कहा कि उत्तरप्रदेश के पूर्व मंत्री महेंद्र अरिदमन सिंह ने इसमें पूरा सहयोग किया।
परंपरागत खेती में जिला समृद्ध, उन्नत की जरूरत
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि परंपरागत कृषि की दृष्टि से जिला समृद्ध है। और संपन्न बनाने के लिए उन्नत कृषि और फूड प्रोसेसिंग का लाभ मुरैना जिले को भरपूर मिले इसके लिए हमने जिला प्रशासन से बात की है। किसान जिला प्रशासन से मिलकर इसका भरपूर लाभ लें। उन्नत कृषि की प्रक्रिया को समझने के लिए जिले में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।उन्नत कृषि को समझने वाले अनेक युवा लाखों की नौकरी छोड़कर खेती की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार खाद, बीज, जैविक खाद सहित आर्थिक मदद भी कर रही है। हमारी खेती देश के विकास में अग्रणी भूमिका अदा करती है और करेगी। तोमर ने कहा कि उन्नत खेती का लाभ छोटे किसानों को मिलेगा। शासन की अधिकांश योजनाएं छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पाती और ऐसी छोटे किसानों की संख्या 86 प्रतिशत से भी अधिक है। हम इन किसानों को नवीन तकनीक से जोडऩे गांवों में प्रोसेसिंग, पैकिंग और कृषि उत्पाद संगठन के माध्यम से जागरुक करने का काम करेंगे।
स्मार्ट ब्लॉक बनेगा पोरसा, प्रदेश में कुल 20
केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि प्रदेश में 20 स्मार्ट ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इनमें एक मुरैना जिले का पोरसा भी शामिल है। स्मार्ट ब्लॉक में किसानों के लिए अनेक योजनाए हैं। इनका लाभ किसानों को मिलेगा। इलाके में नामांतरण न होने की समस्या उनके संज्ञान में आई है। इसके लिए कलेक्टर से बात की है। कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को नामांतरण में परेशानी नहीं आनी चाहिए। किसी का भी नामांतरण प्रकरण लंबित नहीं होना चाहिए। यदि इसके बावजूद समस्या आती है तो, वह व्यक्ति मुझे आवेदन लिखकर दे। एक सप्ताह में उसका निपटारा होगा। तोमर ने कहा कि नामांतरण प्रक्रिया में पटवारियों की कारस्तानी की शिकायतें मिलती रहती हैं। पटवारियों से उलझने की जगह सीधे अधिकारियों के कार्यालय में जाएं और अधिकारी भी न सुने तो हमें बताएं।
शेष बचे बाजरा की होगी खरीदी
तोमर ने कहा कि जिन किसानों का बाजरा समर्थन मूल्य पर खरीदने से रह गया है, उन्हें यह सुविधा दी जाएगी। उनका बाजरा भी 2150 रुपए क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाएगा। किसान इस संबंध में कई बार प्रशासन को अपनी समस्या बता चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी।

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