MOVIE REVIEW: घायल जैसी बात नहीं 'घायल वंस अगेन' में

By: dilip chaturvedi
| Published: 05 Feb 2016, 01:29 PM IST
MOVIE REVIEW: घायल जैसी बात नहीं 'घायल वंस अगेन' में
ghayal

निर्माता: धर्मेंद्र, डायरेक्टर: सनी देओल, कलाकार: सनी देओल, सोहा अली खान , शिवम पाटिल, अंचल मुंजाल, नेहा खान और ऋषभ अरोड़ा, संगीतकार: विपिन मिश्रा और शंकर एहसान लॉय, रेटिंग: 3/5

जयपुर। यदि आप सनी देओल के फैंस हैं, तो यह फिल्म आपको आकर्षित करेगी, लेकिन फिल्म मेेंं 'घायल' जैसी बात नहीं है। फिल्म में युवाओं को केंद्र में रखकर सिस्टम के खिलाफ लड़ाई को दर्शाया गया है। यह फिल्म सनी के निर्देशन की दूसरी फिल्म है। इससे पहले उन्होंने 1999 में आई फिल्म 'दिल्लगी' को डायरेक्ट किया था। फिल्म 'घायल' में भी एक्शन ड्रामा था और इसके सीक्वल में भी एक्शन ड्रामा है।

कहानी: जिन लोगों ने 'घायल' देख रखी है, उन्हें फिल्म का क्लाईमेक्स तो याद ही होगा कि अंत में क्या होता है। जी हां, अजय मेहरा (सनी देआल) विलेन को खत्म करने के बाद इंस्पेक्टर जॉय डिसूजा के आगे सरेंडर कर देता है। इसके सीक्वल की कहानी यहीं से शुरू होती है। अजय मेहरा 14 साल की सजा काटकर जेल से बाहर आता है। वह फिर भ्रष्टाचार और सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है। कहानी आगे बढ़ती है। चार युवा रोहन (शिवम पाटिल), अनुष्का (अंचल मुंजाल), रेणु(नेहा खान) और वरुण(ऋषभ अरोड़ा) का सामना एक भ्रष्ट बिजनेसमैन राज बंसल (नरेंद्र झा) से होता है। राज का शहरभर में एकछत्र राज चलता है। उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक हैं। उसे इस बात का गुमान है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन उसे चारो युवा चुनौती देते हैं और  उनके सामने जब भी कोई मुसीबत आती है, तो राज मेहरा ढाल बन जाता है। 

घायल में जहां राज के साथ तीन भागे हुए कैदी होते हैं, जो राज का साथ देते हैं, जबकि इसके सीक्वल में राज मेहरा पढ़े-लिखे युवाओं का साथ देता है। फिल्म में कैसे-कैसे मोड़ आते हैं। अजय युवाओं के साथ मिलकर किस तरह राज और उसके सम्राज्य का खात्मा करता है, इसे बेहद दिलचस्प ढंग से दर्शाया गया है, लेकिन फिल्म में कुछ नयापन नहीं हैं। हां, यदि आप एक्शन के शौकीन हैं, तो फिल्म देख सकते हैं, बोरियत नहीं होगी।

फिल्म की खासियत
फिल्म में सनी देओल ने काफी मेहनत की है। बतौर डायरेक्टर उनका काम अच्छा है। उन्होंने फिल्म में कुछ नयापन लाने की भरसक कोशिश की है, लेकिन कुछ जगह छोड़कर बाकी नाकाम ही रहे हैं। जहां तक उनके अभिनय का सवाल है, तो हमेशा की तरह वो अट्रेक्ट करते हैं। फिल्म का फस्र्ट हाफ थोड़ा कमजोर है, लेकिन सैकंड हॉफ बांधे रखता है। फिल्म के लोकेशन अच्छे हैं। अफेक्ट आकर्षक लगते हैं। फिल्म के बाकी कलाकारों में नरेंद्र झा का अभिनय सराहनीय है। सोहा अपने रोल में अच्छी लगी हैं। नए कलाकारों ने भी अभिनय की छाप छोड़ी है। फिल्म का गीत-संगीत प्रभावित नहीं करता।