प्रजा से मिलने निकले राजा 'महाकाल', 14 को भी निकलेगी सवारी

प्रजा से मिलने निकले राजा 'महाकाल', 14 को भी निकलेगी सवारी
mahakal prosession at ujjain

कार्तिक-अगहन मास में महाकाल सवारियों की परंपरा निभाई जा रही है। सोमवार 7 नवंबर को राजाधिराज भगवान महाकाल ने सावन की तर्ज पर दूसरी बार नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए।

उज्जैन. कार्तिक-अगहन मास में प्रतिवर्ष निकलने वाली महाकाल सवारियों की परंपरा इस वर्ष भी निभाई जा रही है। सोमवार 7 नवंबर को राजाधिराज भगवान महाकाल ने सावन की तर्ज पर दूसरी बार नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए। 

रामघाट पर जल से अभिषेक
सभा मंडप में पालकी पूजन प्रशासक रजनीश कसेरा ने किया। शाम 4 बजे मंदिर से सवारी शुरू हुई। पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सवारी मुख्य मार्गों से होकर शिप्रा तट रामघाट पहुंची, जहां पावन जल से जलाभिषेक पूजन व आरती उतारी गई। इसके बाद सवारी आगे बढ़ी। भगवान चंद्रमौलेश्वर फूलों से सजी हुई पालकी में विराजमान हो नगरवासियों को दर्शन देने ठाठ-बाट से निकले। इसके बाद शाम 6 बजे तक सवारी पुन: मंदिर पहुंची। 




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अब कब निकलेंगी सवारियां
अन्य सवारियां 14, 21 तथा 28 नवंबर को निकलेंगी। हरि-हर मिलन की सवारी 12 नवंबर को रात 11 बजे महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी, जो गोपाल मंदिर पहुंचेगी। मंदिर व पुलिस प्रशासन द्वारा इस सवारी में रात 8 बजे बाद खतरनाक आतिशबाजी पर रोक लगाई गई है। समिति द्वारा सवारी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। अव्यवस्था फैलाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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