अब Cancer मरीजों की बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता

अब Cancer मरीजों की बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता

Rohit Kumar Tiwari | Updated: 14 Jul 2019, 09:19:12 PM (IST) Mumbai, Mumbai, Maharashtra, India

  • डब्ल्यूएचओ ने बढ़ाईं पांच कैंसर दवाएं
  • कैंसर पीडि़तों को इम्युनोथेरपी से मिलेगी निजात
  • टाटा अस्पताल ने कहा-लाभदायक होगा यह निर्णय

मुंबई. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य क्षेत्र के खिलाफ कैंसर की चुनौती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक दवाओं की सूची में पांच कैंसर दवाओं को सूचीबद्ध किया है। संगठन की ओर से हाल ही में सूची की घोषणा की गई है, जिसमें पहली बार चिकित्सा परीक्षण शामिल है। कैंसर का इलाज करते समय मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। आवश्यक दवाओं की सूची में मुख्य रूप से त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय, रक्त और अस्थि मज्जा कैंसर की दवाएं शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर का उपचार इम्युनोथेरपी से किया जा रहा है। वहीं टाटा के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीपाद बाणावली की मानें तो इस निर्णय से अब मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

टाटा में इम्यूनोथेरेपी लेने वालों का अनुपात कम
डॉ. बाणावली ने कहा कि जारी की गई सूची के अनुसार, दवाओं को अपनाकर कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, टाटा अस्पताल में इम्यूनोथेरेपी लेने वाले रोगियों का अनुपात बहुत कम है। वहीं भारत में आवश्यक दवाओं की सूची में दवाओं का उपयोग बहुत कम है। इन महंगी दवाओं का असर प्रभावी है। आवश्यक दवाओं की सूची में 28 दवाएं वयस्कों के लिए और 23 बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से कुल 460 दवाएं शामिल हैं तो वहीं इसमें 69 चिकित्सा परीक्षण भी शामिल हैं। इसमें एनीमिया, थायराइड, सिकल सेल होता है। रक्त आधान की सुरक्षा के लिए इस दृष्टिकोण में रक्त परीक्षण भी हैं। पिछले साल भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आवश्यक दवाओं की सूची की घोषणा की थी, जिसमें क्षयरोग, एचआईवी, मलेरिया और पीलिया पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

 

फेफड़े कैंसर के सात प्रतिशत मरीज
कैंसर रोकथाम और अनुसंधान विभाग की मानें तो 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के कैंसर के रोगियों में गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर है। इंडियन कैंसर इंस्टीट्यूट के अध्ययन के अनुसार, देश में सात प्रतिशत मरीज फेफड़े के कैंसर के हैं। क्योंकि उनमें से कई दूसरी या तीसरी श्रेणी में हैं, इसलिए उनकी मृत्यु दर अधिक है।

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