सामाजिक समरसता व साम्प्रदायिक सौहार्द पर चिंतन

नवोदयंस व राजस्थान पत्रिका की साझा मुहिम - सामाजिक ताना बाना तोडऩे वाले टीवी डिबेट रोकने की उठी मांग, शनिवार को मूण्डवा में होगा महासंगम

By: shyam choudhary

Published: 24 May 2018, 12:17 PM IST

मूण्डवा. साधारण लोग ही असाधारण काम कर सकते हैं। वर्तमान में हमारे देश में सामाजिक व धार्मिक ताने बाने को तोडऩे का जो कुचक्र चल रहा है। उसके समाधान के लिए हम किसी अवतार की तो अपेक्षा नहीं कर सकते। जो भी करना है, हम सभी समाज के जागरूक लोगों को मिलकर करना होगा। और इसमें सबसे बड़ा काम सकारात्मक वातावरण को बनाए रखने का है। साथ ही भाईचारे की मजबूती के लिए कुछ नवाचार भी किए जा सकते हैं। नवोदयंस की शिक्षा-दीक्षा जाति तथा धर्म के भेदभाव से दूर हुई है। इस शिक्षा में समाज का बड़ा योगदान है। जिसके लिए नवोदयंस कार्य करने को आतुर है। साथ ही राजस्थान पत्रिका मीडिया में सामाजिक सरोकार की मिसाल कायम कर रही है। यह विचार नवोदय विद्यालय कुचामन के पूर्व विद्यार्थी तथा तिलवासनी जोधपुर विद्यालय के शिक्षक हनुमान चोयल ने नवोदयंस का प्रतिनिधित्व करते हुए व्यक्त किए।
स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल विद्यालय में समाज के गणमान्य नागरिकों की बैठक में बुधवार को विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सामाजिक समरसता तथा साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए मॉडल स्कूल में शनिवार को होने वाले समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के हर जिले से नवोदयंस का प्रतिनिधित्व होगा तथा इसके अलावा दिल्ली, झारखंड तथा हरियाणा से भी विद्वतजन शामिल होंगे।
बैठक में नागरिकों ने कई सुझाव भी दिए। नगरपालिका अध्यक्ष घनश्याम सदावत ने कहा कि मूण्डवा तो साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। यहां सकारात्मक विचारों वाले लोगों की कमी नहीं है। अच्छे कार्य के लिए अगुवाई करने वाला व्यक्ति चाहिए। शिक्षक नेता विरेन्द्र सेवर ने सुझाव दिया कि हम एक-दूसरे समाज तथा धर्म के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाए तो हृदय जीते जा सकते हैं। वीर ग्रुप के केशव त्रिपाठी ने कहा कि सोशियल मीडिया सबसे घातक साबित हो रहा है। हमें एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि यदि कोई गलत बात प्रचारित कर रहा है तो उसे आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। एंकर मनीष मूण्डवा ने कहा कि दुष्प्रचार को हम सभी मिलकर निश्चित रूप से रोक सकते हैं। दिनेश प्रजापत ने कहा कि विद्यार्थियों के नाम के साथ जाति लिखने की परम्परा को छोडऩा चाहिए क्योंकि व्यक्ति की पहचान काम से होती है नाम से नहीं होती। मॉडल स्कूल के शिक्षक कंवरीलाल ने बताया कि अपने बच्चों को सभी समाज व धर्म के साथ प्रेमपूर्ण रहने के संस्कार परिवार से ही दिए जाने चाहिए।
संस्कृत शिक्षक ख्वाजा हुसैन भाटी ने कहा कि यह संक्रमण काल है। हम एक दूसरे का सम्मान करें तथा आदर दें तो निश्चित रूप से कोई विवाद ही नहीं रहेगा। अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन से जुड़े गब्बरसिंह राठौड़ ने कहा कि वसुदैव कुटुम्बकम की अवधारणा से ही हम विकास कर सकते हैं। बीसीएमओ डॉ.़ राजेश बुगासरा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का काम एक दूसरे समाज व धर्म के व्यक्ति के बिना नहीं चल सकता। मॉडल स्कूल के प्रधानाचार्य भंवरलाल जाट ने कहा कि अच्छाई की मार्केटिंग करना सबसे जरूरी है। रामनिवास राव ने पूर्वोतर राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जाति व धर्म का भेद नहीं के बराबर है। नवोदयंस ने पत्रिका के साथ जो बीड़ा उठाया है वह सराहनीय है। अध्यापिका कमला चौधरी ने कहा कि महिलाओ की भी बराबर की भागीदारी है। बैठक में ओमप्रकाश मुण्डेल, खुर्शीद आलम, रामलाल चौधरी, रुपेश पाराशर, अभिषेक तिवाड़ी, दामोदर ईनाणियां, हंसराज वैष्णव, श्यामसिंह बाघेला, पार्षद उमर फारूख, कनिष्ठ अभियंता कमलेश फुलफगर, संदीप वर्मा, मोहम्मद अली मिस्त्री, पार्षद शैतानराम, मनोज दाधिच, मुकेश दाधिच, जयप्रकाश भट्टड़, विनोद ओझा, तुलछीराम मुण्डेल, अशोक बड़ौला, जयसिंह, प्रकाशकुमार, मोहम्मद हुनीस, सोहनराम धायल, प्रवीण, इन्द्रराज नरादणियां, मॉडल स्कूल के शिक्षक सहित कई जने उपस्थित थे।

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