script पति को पैसे को लेकर ताने मारना तलाक का आधार, जानिए हाईकोर्ट ने ऐसा क्यों कहा | Constant taunting over financial limitations is a legitimate ground for divorce: Delhi High Court | Patrika News

पति को पैसे को लेकर ताने मारना तलाक का आधार, जानिए हाईकोर्ट ने ऐसा क्यों कहा

locationनई दिल्लीPublished: Feb 03, 2024 09:15:56 pm

Submitted by:

Shaitan Prajapat

कोर्ट ने पत्नी द्वारा अपने पति की वित्तीय क्षमता को लेकर लगातार ताने मारने और अपनी क्षमता से परे असाधारण सपनों को पूरा करने के लिए उस पर दबाव डालने को मानसिक क्रूरता के समान बताते हुए कहा है कि इस आधार पर तलाक उचित है।

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यदि पत्नी अपने पति को वित्तीय क्षमता को लेकर लगातार ताने मारती है और अपनी क्षमता से ज्यादा असाधारण सपनों को पूरा करने के लिए उस पर दबाव डालती है तो यह तलाक का उचित आधार हो सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे मानसिक क्रूरता के समान बताते हुए कहा कि इस आधार पर तलाक उचित है। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा कि जीवनसाथी को उसकी वित्तीय सीमाओं की लगातार याद नहीं दिलानी चाहिए। अनुचित मांगें लगातार असंतोष पैदा कर सकती हैं, जिससे मानसिक तनाव हो सकता है।


कोर्ट ने खारिज की याचिका

पत्नी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसने पीठ ने खारिज कर दिया। इसमें क्रूरता के आधार पर पति को तलाक देने के पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। पारिवारिक अदालत ने पति की याचिका पर विचार किया, जिसमें कहा गया कि पत्नी की हरकतें, जिसमें उसे घर छोड़ने के लिए मजबूर करना, कर्ज लेने के लिए ताना देना और सीमित संसाधनों के साथ तालमेल बिठाने से इनकार करना शामिल है, मानसिक क्रूरता है।

पत्नी की ऐसी हरकतें मानसिक क्रूरता

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पति या पत्नी पर दूर के और सनकी सपनों को पूरा करने के लिए दबाव डालना जो स्पष्ट रूप से उसकी वित्तीय पहुंच के भीतर नहीं है, लगातार असंतोष की भावना पैदा कर सकता है, जो किसी भी विवाहित जीवन से संतुष्टि और शांति को खत्म करने के लिए पर्याप्त मानसिक तनाव होगा।

ऐसी स्थिति में वैवाहिक रिश्ते को बनाए रखना असंभव

लगातार कलह और झगड़ों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रतीत होने वाली महत्वहीन घटनाएं, जब समय के साथ हावी हो जाती हैं, तो मानसिक तनाव पैदा कर सकती हैं, जिससे पति-पत्नी के लिए अपने वैवाहिक रिश्ते को बनाए रखना असंभव हो जाता है।

तलाक का जायज आधार

अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1ए)(ii) का हवाला देते हुए कहा कि इस धारा के तहत राहत, वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश का पालन न करने पर तलाक की अनुमति देना, किसी भी पक्ष के लिए पूर्ण अधिकार है।

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