scriptDrug smuggling in Mumbai has a long history | आर्यन खान ही नहीं, मुंबई में अंग्रेजों के जमाने से हो रहा ड्रग माफिया का खेल | Patrika News

आर्यन खान ही नहीं, मुंबई में अंग्रेजों के जमाने से हो रहा ड्रग माफिया का खेल

हाजी मस्तान, करीम लाला, मुदलियार से होते हुए दाऊद-छोटा राजन तक रहे नशे के खेल में शामिल।

नई दिल्ली

Published: October 17, 2021 11:06:27 am

मुंबई । क्रूज ड्रग्स पार्टी मामले में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी को लेकर नेताओं की तल्ख बयानी के बीच एनसीबी का एक्शन जारी है। महानगर के बांद्रा, अंधेरी और पवई के कुछ ठिकानों पर शनिवार को छापा मार कर तलाशी ली गई। बिल्डर और फिल्म निर्माता इम्तियाज खत्री से भी पूछताछ की गई। एनसीबी की कार्रवाई को सत्ताधारी महाविकास आघाडी महाराष्ट्र को बदनाम करने की साजिश तक कह चुकी है। जहां तक मायानगरी का सवाल है तो अंग्रेजों के जमाने से ड्रग्स माफिया का खेल चल रहा है। माफिया आजादी के बाद राजनीतिक संरक्षण के लिए नेताओं से भी हाथ मिलाते रहे। करीम लाला, हाजी मस्तान, वरदराजन मुदलियार जैसे डॉन से शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी है। दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन उसी को आगे बढ़ा रहे हैं।

आर्यन खान ही नहीं, मुंबई में अंग्रेजों के जमाने से हो रहा ड्रग माफिया का खेल
आर्यन खान ही नहीं, मुंबई में अंग्रेजों के जमाने से हो रहा ड्रग माफिया का खेल

1893 में अफीम पर लगी रोक -
नशाखोरी रोकने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने 1893 में संसदीय आयोग बनाया था। इसने अफीम पर पाबंदी की सिफारिश की थी। ऊंचे तबके के लोग मदक हाउसेज में अफीम सेवन करते थे। गवर्नर के आदेश पर इन्हें बंद कर दिया। 600 लोग गिरफ्तार किए गए थे।

शराब-कोकीन की ओर बढ़ा झुकाव -
तत्कालीन पुलिस आयुक्त एसएम एडवड्र्स (1909-16) ने नशाखोरी पर एक किताब लिखी थी। उसमें बताया गया है कि मदक हाउसेज बंद होने के बाद अफीम पर झूमने वाले लोगों का झुकाव शराब की ओर बढ़ा। सख्ती के बावजूद अवैध रूप से शराब की तस्करी होती थी। वरदराजन मुदलियार और हाजी मस्तान गिरोह तस्करी में शामिल था। इसी दौरान कोकीन की एंट्री हुई। शुरू में लोग कोकीन को चबाते थे। पुरुष ही नहीं, महिलाएं और बच्चे भी इसका सेवन करते थे।

विदेश से हो रही ड्रग्स की तस्करी -
दस्तावेजों के मुताबिक, कोकीन की तस्करी विदेश से होती थी। 1911 में एक जहाज पर तैनात ऑस्ट्रियाई अपने जूते में छिपा कर कोकीन लाया था। 1912-13 में पुलिस ने 45,500 रुपए और 17 हजार कीमत की कोकीन को दो बड़ी खेप पकड़ी थी। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद तस्करी कम हो गई। लेकिन, 1930 के बाद यह फिर तेजी से बढ़ी, जिससे आज तक निजात नहीं मिली है।

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