प्रशासन की आंख से काजल चुरा रहा था केंटीन संचालक

प्रशासन की आंख से काजल चुरा रहा था केंटीन संचालक

harinath dwivedi | Publish: Feb, 15 2018 01:29:32 PM (IST) Neemuch, Madhya Pradesh, India

तब हो सकती है ६ माह की कैद या ५ लाख का जुर्माना

नीमच. जिस विभाग में खाद्य लाइसेंस बनाए जाते हैं उसी परिसर में संचालित केंटीन के संचालक के पास जांच में खाद्य लाइसेंस नहीं मिला। केंटीन की शिकायत मिलने पर जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने जांच की तो सच्चाई का पता चला। नए नियम अनुसार अब बिना खाद्य लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति खाद्य पदार्थे से संबंधित व्यापार नहीं कर सकता। ऐसा होने पर ६ माह की कैद या ५ लाख रुपए तक जुर्माना वसूला सकता है।
लगातार मिल रही थी शिकायत
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी ने बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की नियंत्रक एवं खाद्य सुरक्षा आयुक्त उज्जैन पल्लवी जैन ने पिछले दिनों निर्देश दिए हैं कि जहां भी पोहा का उपयोग होता है इसकी जांच की जाए। कुछ लोग ऐसे पोहा का उपयोग कर रहे हैं जो चावल से नहीं बने हैं। इस प्रकार के पोहा का उपयोग करने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. पंकज शर्मा को भी जिला अस्पताल में संचालित केंटीन के बारे में शिकायतें मिल रहीं थी। इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए बुधवार को अस्पताल परिसर में संचालित केंटीन पर जांच की। सबसे पहले केंटीन संचालक से खाद्य लाइसेंस मांगा गया। जो मौके पर संबंधित उपलब्ध नहीं करा सका। इस पर केंटीन संचालक को तीन दिन का समय दिया गया कि वह इस समयावधि में खाद्य लाइसेंस दिखाए। यदि इसके बाद भी वे लाइसेंस नहीं दिखा पाते हैं तो उन्हें नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोलंकी ने बताया कि कमिश्नर के मिले निर्देशानुसार केंटीन में रखे करीब २० किलो पोहा में से सेम्पल भी लिया गया है। सेम्पल को जांच के लिए राज्य खाद्य निरीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजा जाएगा। भोपाल से सेम्पल की जांच रिपोर्ट १४ दिन में प्राप्त होती है। यदि पोहा में किसी प्रकार की मिलावट पाई गई तो आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सोलंकी ने बताया कि केंटीन में जांच के दौरान किसी प्रकार की अन्य प्रतिबंधित वस्तु या सामग्री नहीं मिली। १०-२० कचौरी ही वहां रखी थी। बिड़ी सिगरेट बेचने की शिकायत अवश्य की गई होती लेकिन मेरी जांच में इस प्रकार की कोई वस्तु वहां नजर नहीं आई।
अनिवार्य हो चुका है खाद्य लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी ने बताया कि नए कानून के तहत एक रुपए से लेकर एक करोड़ तक का व्यापार करने वाले व्यक्ति को खाद्य लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यदि संबंधित के पास लाइसेंस नहीं है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार खाद्य एवं औषधि प्रशासन अधिकारी को है। जिले में अब तक करीब २५-३० व्यापारियों के खिलाफ खाद्य लाइसेंस नहीं होने पर प्रकरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इनमें ऐसे व्यापारी भी हैं जिनमें पास लाइसेंस के साथ ही संस्था का रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। अब कोई भी व्यापारी बिना खाद्य लाइसेंस व्यापार नहीं कर सकता। न ही इससे बच सकता है।
तो हो सकती है ६ माह की कैद
विभाग की कमिश्नर और सीएमएचओ के निर्देशानुसार बुधवार को जिला अस्पताल में संचालित केंटीन पर जांच की थी। जांच में मौके पर खाद्य लाइसेंस नहीं दिखाया गया। निर्धारित समयावधि में भी यदि वे लाइसेंस नहीं दिखा पाते हैं तो संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर ६ माह की कैद और ५ लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।
- राजू सोलंकी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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