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उत्तराखंड के बाद अब और कहां-कहां आने जा रहा है UCC?

locationनई दिल्लीPublished: Feb 07, 2024 12:00:23 pm

Submitted by:

Anand Mani Tripathi

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश होने के बाद करीब आधा दर्जन राज्य इसे लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।

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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है। इस विधेयक को लेकर सदन में चर्चा जारी है। बस चंद दिनों की बात है समान नागरिक संहिता विधेयक कानून बन जाएगा। इसके बाद यह पहला राज्य हो जाएगा। जहां सभी नागरिकों के समान अधिकारी होंगे। इस कानून को अन्य कई राज्य भी लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। आइए्र आपको बताते हैं कि और कहां कहां लागू होगा समान नागरिक संहिता विधेयक...

गुजरात
गुजरात भी समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी है। गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने 2022 में ही कह दिया था कि UCC लागू करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करने का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग 4 में भी किया गया है।

असम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जनवरी में कहा था कि असम इसे लागू करने वाला तीसरा राज्य होगा। यह आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं होगा लेकिन बहु और बाल विवाह पर रोक हागी। असम सरकार इस महीने विधानसभा के बजट सत्र में एक विधेयक लाने की योजना बना रही है।

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता विधेयक लाया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश विधेयक से असहमत नहीं है। इसे सही समय पर प्रदेश में लागू किया जाएगा।

हरियाणा
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने 2022 में कहा था कि राज्य में समान नागरिक संहिता विधेयक को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। सरकार के लिए प्रत्येक नागरिक समान है।

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना की सरकार समान नागरिक संहिता के समर्थन में है। शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने इसे बाल ठाकरे का सपना बताया था।

मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि उनकी सरकार समान नागरिक संहिता लागू करेगी। केंद्र सरकार इसमें जो भी कहेगा उसकी पालना होगी।

केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु
समान नागरिक संहिता को लेकर केरल विरोध में है। इस मामले को लेकर विधानसभा ने अगस्त में समान नागरिक संहिता के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। वहीं तमिलनाडु मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी समान नागरिक संहिता के पक्ष में नहीं हैं।

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