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तपती धरा पर राहत की फुहारें, पक्षियों के लिए बन रही हैं ऊंची मीनारें

बीकानेर. पक्षी पेड़ों पर अथवा अपने घोंसले बनाकर रहते हैं। अगर यह कहा जाए कि पक्षी भी पक्के और बहुमंजिला छोटे-छोटे आवासों में समूह के रूप में रहते हैं, तो हर किसी को आश्चर्य होगा। यह हकीकत है। बीकानेर में अनेक स्थानों पर बने पक्षी आवास गृहों में पक्षियों के सैकड़ों परिवार सुरक्षित रूप से रह […]

बीकानेरMay 25, 2024 / 09:09 pm

Vimal

बीकानेर. पक्षी पेड़ों पर अथवा अपने घोंसले बनाकर रहते हैं। अगर यह कहा जाए कि पक्षी भी पक्के और बहुमंजिला छोटे-छोटे आवासों में समूह के रूप में रहते हैं, तो हर किसी को आश्चर्य होगा। यह हकीकत है। बीकानेर में अनेक स्थानों पर बने पक्षी आवास गृहों में पक्षियों के सैकड़ों परिवार सुरक्षित रूप से रह रहे हैं। सेवाभावी लोगों की ओर से इन पक्षी आवास गृहों का निर्माण करवाया गया है। इनमें पक्षियों के आशियाने हैं। इनकी ऊंचाई जमीन से 40 से 50 फीट तक है। ये ऊंची मीनारें न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि यहां दाना-पानी की भी पुख्ता व्यवस्थाएं रहती हैं।
हजारों पक्षियों का डेरा

शहर में पांच स्थानों पर बने पक्षी गृहों में पक्षियों का डेरा बना है। सैकड़ों पक्षियों का जन्म इन गृहों में ही हो रहा है। वे यहीं पल और बढ़ रहे हैं। इनके आस पास स्थित पेड़ों पर पक्षियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। इन पक्षी आवास गृहों में चिड़िया, कबूतर, कौआ सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आशियाने हैं।
और स्थानों की भी हो रही है पहचान, ताकि बन सकें पक्षी गृह

शहर में राव बीका टेकरी के नजदीक स्थित आचार्य बगीची, धरणीधर महादेव मंदिर परिसर, महानंद महादेव मंदिर परिसर, संसोलाव तालाब आगोर परिसर, म्यूजियम भ्रमण पथ परिसर में पक्षी गृह बने हैं। सेवाभावी लोग और स्थानों को भी चिह्नित कर रहे हैं, जहां पक्षियों की संख्या अधिक है। प्राकृतिक रूप से माहौल पक्षियों के अनुकूल हो। ऐसे स्थानों का चयन किया जा रहा है। जल्द शहर में कुछ और स्थानों पर ऐसे पक्षी आवास गृहों का निर्माण हो सकता है। भीनासर स्थित मुरली मनोहर चारागाह क्षेत्र, सुजानदेसर कालीमाता मंदिर के पीछे स्वरूपदेसर रोड, नंदी गौशाला परिसर नोखा रोड गंगाशहर तथा जोड़बीड़ भैंरुनाथ मंदिर परिसर में पक्षी गृह का निर्माण हो रखा है।
स्वछंद विचरण, चैन का बसेरा व मधुर ध्वनि

पक्षी आवास गृहों के पास का नजारा सुबह और शाम देखते ही बनता है। सूर्य की पहली किरण आसमान में दिखाई देते ही पक्षियों की कर्णप्रिय ध्वनि, आपसी अठखेलियां, मस्ती, आसमान में समूह रूप में उड़ान और फिर आवास में प्रवेश का दृश्य मनोरम बना रहता है। इन पक्षी गृहों के कारण पक्षी तेज सर्दी, भीषण गर्मी और बारिश से बच सकते हैं।

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