
-कलेक्टर द्वारा मातृ-शिशु मृत्युदर को लेकर उठाए गए ठोस कदम के दौरान सामने आई हकीकत।
-हाइ रिस्क प्रसूताओं का रखा जाएगा विशेष ख्याल, प्रसव के बाद ४५ दिनों तक होगा फॉलोअप
दमोह. जिले में मातृ-शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाने के लिए मातृत्व सुरक्षा अभियान को पहली बार गंभीरता से लिया गया। शनिवार को जिले के ८ स्थानों पर शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में स्त्रीरोग विशेषज्ञों नजर आई। इधर, देर शाम मिले आंकड़े हैरान करने वाले हैं। आंकड़ों में ९६१ प्रसूताओं की जांच हुई। इनमें ५० फीसदी से अधिक प्रसूताएं हाइ रिस्क मिली हैं। साफ है कि स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों पर इन प्रसूताओं की जांचें शतप्रतिशत नहीं हुई। इस वजह से यह हाइ रिस्क में पहुंच गई हैं।
बहरहाल, हाइ रिस्क में निकली प्रसूताओं का चिंहित करने के बाद अब इन्हें विशेष मॉनीटरिंग में रखा जा रहा है। प्रसव में गंभीरता बरतने की बात कही जा रही है। साथ ही प्रसव बाद ४५ दिनों तक आशाओं के जरिए इनका फॉलोअप किया जाना बताया जा रहा है।
-जिला अस्पताल में एडीएम पहुंची निरीक्षण करने
कलेक्टर ने मातृत्व सुरक्षा अभियान में निरीक्षण के लिए अन्य विभागों की महिला अधिकारियों को शिविर में निरीक्षण करने के लिए निर्देशित किया था। इसी कड़ी में एडीएम मीना मसराम ने जिला अस्पताल पहुंची, जहां उन्होंने एमसीएच में लगाए गए शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां जांच कराने पहुंची प्रसूताओं से बात की। पंजीयन देखे और हाइ रिस्क महिलाओं की जानकारी ली।
-यहां पर लगाए गए शिविर
शिविर जांचें
जबेरा 162
पथरिया 127
पटेरा 80
बटियागढ़ 101
हटा 195
जबेरा 117
होंडोरिया 84
डीएच 95
केस 1
पथरिया स्वास्थ्य केंद्र में लगाए गए शिविर में
प्रसूता कमला अठ्या निवासी इमलिया घाना ने जांच कराई। जांच में प्रसूता हाई रिस्क निकली। वहीं, जांच में पाया कि उसके गर्भाशय में सिस्ट। प्रसव काल पूर्ण होने के चलते प्रसूता की तुरंत डिलीवरी कराई गई। बताया जाता है कि जच्चा-बच्चा स्वस्थ है। वहीं, सिस्ट का ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया जाएगा।
केस 2
पथरिया में ही सात महीने की गर्भवती रोशनी पति अभिषेक की जांच की गई। उसका ब्लड प्रेशर बहुत कम निकला। तुरंत उसे भर्ती किया गया और उसका बीपी कंट्रोल होने के बाद ही उसे जाने दिया। हाइ रिस्क में चिंहित महिला की सभी प्रकार की जांच कराई गई।
पत्रिका की खबर के बाद कलेक्टर ने बनाई थी रणनीति
पत्रिका ने मातृ-मृत्युदर के संबंध में खबरें प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि पिछले साल २६ प्रसूताओं की मौत हुई थी। इनमें १८ पहली बार मां बनी थीं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा आंकड़े छिपाने जाने की हकीकत भी प्रकाशित की थी। कलेक्टर सुधीर कोचर ने इस स्थिति को चिंताजनक मानते हुए एक रोड मेप तैयार किया था। उसी के तहत आज जिले भर में आयोजित शिविर सिस्टेेमेटिक तरीके से लगाए गए और गंभीरता से प्रसूताओं की जांच की गई।
.डीएच में दो और तीन तैनात शिविरों में
जिला अस्पताल में आयोजित शिविर में डॉण् सीमा पटेल व गीतांजलि सिद्धांत ने प्रसूताओं की जांच की। वहींए अस्पताल से ही डॉण् मेघना श्रीवास्तवए रविंद्र कुमार और डॉण् सोनाली जैन की ड्यूटी ब्लॉक स्तर पर आयोजित शिविर में लगाई गई।
.शिविर में यह मिली कमियां
डीएच में आयोजित शिविर में खून की कमीए वजन वाली प्रसूताएं मिली। कुछ प्रसूताओं का वजन ३० किलो के आसपास था। वहींए किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था तो किसी का कम था। कुछ प्रसूताओं की शुगर बढ़ी थी।
Published on:
25 May 2024 08:22 pm
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