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राजनीति के केंद्र में रहा जिला, मगर विकास से अब भी अछूता

District remained at the center of politics

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टीकमगढ़। टीकमगढ़ शहर।

टीकमगढ़। टीकमगढ़ शहर।

मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक पहुंचे है जिले के नेता

टीकमगढ़. टीकमगढ़ जिले का राजनीति में अपना ही दबदबा रहा है। आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव से लेकर ही आज तक जिले के जनप्रतिनिधियों को कभी प्रदेश की सरकार में तो कभी केंद्र की सरकार में जगह मिलती रहती है। टीकमगढ़ जिले को ही प्रदेश की पहली और एक मात्र महिला मुख्यमंत्री देने का श्रेय जाता है। वहीं जिले से चुने गए सांसदों को केंद्र के मंत्री मंडल में भी प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है, इसके बाद भी जिला विकास से अछूता बना हुआ है।
टीकमगढ़ जिला आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन सुविधाओं और सिंचाई के लिए तरस रहा है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए आज भी जिले में पलायन की स्थिति बनी है तो खेती अब भी मानसून आधारित है। परिवहन को लेकर आलम यह है कि जहां जिले की सीमाओं से लगे तमाम जिलों का फोरलेन के माध्यम से देश भर से कनेक्शन हो चुका है, तो जिले में इसके लिए अब भी लोग इंतजार कर रहे है। यह स्थिति तब है, जब जिले से एक से एक दिग्गज नेता न केवल मंत्री बने है, बल्कि उन्होंने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे पद भी प्राप्त किए है।
स्वतंत्रता के बाद से ही मिला स्थान
विदित हो कि देश की स्वतंत्रता के साथ ही जिले के नेताओं को देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान मिलना शुरू हो गया था। स्वतंत्रता के बाद विंध्य प्रदेश का हिस्सा होने पर यहां से पहली बार हुए आम चुनाव में 1952 में निवाड़ी जिले के लाला राम वाजपेयी को गृहमंत्री बनाया गया था। इसके बाद 1967 में नरेंद्र सिंह जू देव ऊर्जा मंत्री बने, तो 1993 में यादवेंद्र सिंह बुंदेला को आबकारी मंत्री बनाया गया। फिर 2003 में दिग्विजय सिंह की सरकार को हटाने वाली जिले की कद्दावर नेता उमा भारती को प्रदेश की कमान मिली और मुख्यमंत्री का पद मिला। इसके बाद 2008 में जतारा विधायक हरिशंकर खटीक को मंत्री मंडल में शामिल किया। वर्ष 2019 में पृथ्वीपुर विधायक बृजेंद्र सिंह तो वर्ष 2023 के अंतिम दौर में खरगापुर विधायक रहे राहुल सिंह लोधी को मंत्री मंडल में शामिल किया गया था। इसके साथ ही उमा भारती और निवर्तमान सांसद वीरेंद्र कुमार भी दो बार केंद्र में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके है।
इनके कार्यक्रम में हुए काम
जिले से मंत्री बनने के बाद काम भी हुए है, लेकिन जिस प्रकार से संभाग के दूसरे जिलों का विकास है, उसकी तुलना में जिले की गति काफी धीमी है। केंद्र में मंत्री रहते हुए उमा भारती ने जिले में साई सेंटर और कृषि महाविद्यालय की स्थापना कराई तो बान सुजारा बांध और हरपुरा नहर के लिए मंत्री रहते हुए हरिशंकर खटीक ने प्रयास किया और सफलता प्राप्त की। वहीं नरेंद्र सिंह जू देव के समय में जिले में बिजली के लिए काम किया गया। इसके साथ ही बृजेंद्र सिंह ने कांग्रेस की सरकार में ग्राम जेर में 90 हैक्टेयर में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना पर काम शुरू किया था, लेकिन बीच में ही सरकार गिर जाने से यह काम अधर में लटक गया था।
इन कामों की जरूरत
विदित हो कि टीकमगढ़ की सीमा से लगे छतरपुर जिले में जहां मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी के साथ ही जिला चिकित्सालय में तमाम सुविधाएं लोगों को मिल रही है तो यहां पर तीन-तीन फोरलेन से जिले का हर बड़े शहर से जुड़ाव हो गया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से भी छतरपुर जिले के 600 से अधिक गांव सिंचाई से परिपूर्ण होने वाले है। जबकि जिले में आज भी लोग विकास को रफ्तार देने के लिए एक फोर लेन के लिए तरस रहे है। उच्च शिक्षा के नाम पर जिले में महज पीजी कॉलेज है तो यहां पर संसाधन भी पर्याप्त नहीं है। सिंचाई की सुविधाओं के अभाव में आधे से अधिक जिला सूखा पड़ा हुआ है। इस पर अब भी कोई काम होता नहीं दिखाई दे रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना में जिले के मात्र 132 गांवों को शामिल किया गया है। डॉक्टरों की उपलब्धता न होने से स्वास्थ्य केंद्र रिफेर केंद्र बन कर रहे गए है। इन समस्याओं को लेकर अब भी प्रयास होते नहीं दिखाई दे रहे है।