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चयन में अनदेखी पड़ रही भारी

locationकरौलीPublished: Jan 16, 2015 11:56:46 am

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करौली। जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत निर्धारित से अधिक लाभार्थी चयन करना रसद विभाग व ड...

करौली। जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत निर्धारित से अधिक लाभार्थी चयन करना रसद विभाग व डीलरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। कार्मिकों ने सरकार द्वारा जनसंख्या के हिसाब से निर्घारित संख्या से अधिक का चयन कर लिया। वहीं इस माह पहले से कम आ रहे गेहंू मे और कटौती कर दिए जाने से विभाग की मुश्किलें बढ़ गई है। अक्टूबर 2013 में लागू हुई योजना में विभिन्न श्रेणियों के लोगों का चयन किया जाना था। इसमें बीपीएल, स्टेट बीपीएल व अन्त्योदय के लाभार्थियों को शामिल करते हुए लाभार्थियों की संख्या शहरी क्षेत्र में 53 तथा ग्रामीण क्षेत्र में 69.9 फीसदी रखनी थी।

चयनित लाभार्थी को प्रतिमाह पांच किलो गेहंू दो रूपए किलो में दिया जाना था। लाभार्थी चयन के दौरान पंचायत व स्थानीय निकाय के कार्मिकों ने विभाग के दिशा-निर्देशों को समझे बिना ही सभी को योजना में शामिल कर लिया। चयन का आंकड़ा देख रसद विभाग भी सकते में आ गया। वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 14 लाख 58 हजार 248 है। योजना में 13 लाख 24 हजार 460 लोगों का चयन किया गया, जो कि जनसंख्या का 90.81 फीसदी है। इसके हिसाब से जिले के लिए करीब 6500 एमटी गेहंू की आवश्यकता है, जबकि जिले को 5815 एमटी मिल रहा है।

इसमें से भी मार्च माह में 692 एमटी गेहंू की कटौती कर दी गई। ऎसे में इस माह गेहंू का वितरण कर लाभार्थियों को संतुष्ट कर पाना विभाग व डीलरों के लिए चुनौती भरा होने के साथ फसाद की भी जड़ साबित होता नजर आ रहा है.यंू हुई चयन में खामी: खाद्य सुरक्षा योजना में लाभार्थी चयन के दौरान कार्मिक दुविधा में रहे। वहीं सरकार कीर ओर से भी योजना को लागू करने की जल्दबाजी के कारण चयन में खामी आई। नए चयनित व बीपीएल, स्टेट बीपीएल व अन्त्योदय के लाभार्थियों को शामिल करते हुए शहर में 53 व ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या का 69.9 फीसदी का आंकड़ा होना चाहिए था, लेकिन कार्मिकों ने बीपीएल, स्टेट बीपीएल व अन्त्योदय लाभार्थियों को अलग रखते हुए चयन किया। इस कारण यह आंकड़ा 80-90 फीसदी और कुछेक इलाकों में 100 फीसदी पहंुच रहा है। इसके अलावा एक ही व्यक्ति का दो-दो जगह चयन कर लिए जाने के कारण भी आंकड़ा अधिक हो गया है।

...तो डीलर भी उठा रहे फायदा
चयनित परिवारों के हिसाब से गेहंू नहीं मिलने से रसद विभाग के साथ डीलरों के सामने भी लाभार्थियों को संतुष्ट करने की परेशानी है। गेहंू नहीं मिलने पर जहां उपभोक्ताओं ने डीलरों को मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, वहीं इस व्यवस्था का कई डीलर लाभ उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार से कम गेहंू मिलने का बात कह आवंटित गेहंू भी बाजार में बेचा जा रहा है। वहीं योजना में चयनित कई परिवार तो गेहंू लेने की बजाय उनके राशनकार्ड पर मिलने वाले गेहंू के बदले सात-आठरूपए किलो की राशि ले रहे हैं, जबकि पात्र व्यक्ति दो वक्त के अनाज से वंचित है।

सही करने के लिए कहा है

जिला रसद अधिकारी लियाकत अली खान ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार लाभार्थियों की शहर में 53 व ग्रामीण में 69.9 फीसदी कर भिजवाने के लिए पंचायत समिति व नगर निकायों को पत्र भेज रखा है। लेकिन कहीं से भी सही चयन होकर सूची नहीं मिली है। इस कारण गेहंू वितरण में समस्या आ रही है।

73 प्रतिशत से अधिक का चयन

हिण्डौनसिटी. खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में निर्घारित 53 प्रतिशत यूनिट के बजाए 73 प्रतिशत लाभार्थियों का चयन करने के बाद 20 प्रतिशत को हटाना नगर परिषद प्रशासन के लिए गलफांस बन गया है। रसद विभाग ने अधिक चयन की हुई 20 प्रतिशत यूनिटों को सूची से हटा 53 प्रतिशत के हिसाब से ही गेहूं वितरण के निर्देश दिए हैं। नगर परिषद प्रशासन ने अधिकांश लोगों को लाभ पहुंचाने की गरज से वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार 73 प्रतिशत से भी अधिक यूनिटों का चयन कर दिया।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने चयनित सूची को गलत मानते हुए निर्घारित प्रतिशत के आधार पर ही पुन: सूची बनाने को कहा। इसके चलते जनवरी माह से भारतीय खाद्य निगम ने परिषद द्वारा जारी सूची के आधार पर गेहूं की मात्रा उपलब्ध कराने से मना कर दिया। इससे क्रय-विक्रय सहकारी समिति को चयनित यूनिटों के आधार पर पर्याप्त गेहूं नहीं मिला। डीलरों ने भी वितरण के लिए कम गेहूं आवंटित होने से समिति से प्राप्त नहीं किया। पिछले दिनों जिला प्रशासन की हुई बैठक में नगर परिषद प्रशासन को सूची को 53 प्रतिशत के हिसाब से बनाने के निर्देश दिए। इसमें बीपीएल, स्टेट बीपीएल, अंत्योदय, आस्था कार्ड, कुष्ठ रोगी, एचआईवी पीडित व्यक्तियों के राशन कार्डो एवं यूनिटों की संख्या का सही आंकलन करने को कहा गया। अब नगर परिषद प्रशासन यह सोचने पर मजबूर है कि किन 20 प्रतिशत लाभार्थी यूनिटों को योजना से हटाया जाए। इधर खाद्य सुरक्षा का गेहूं नहीं मिलने से पात्र व्यक्ति रोजाना डीलरों की उचित मूल्य की दुकान पर एवं नगर परिषद में चक्कर लगा रहे हैं।

डीलर नहीं दे रहे एपीएल का गेहूं: क्रय-विक्रय सहकारी समिति में गेहूं आवंटन कम होने से डीलरों से कम मात्रा में गेहूं का उठाव करने की कही गई। डीलरों ने विवाद की स्थिति से बचने के लिए जनवरी माह में तो एक बार गेहूं लेने से मना कर दिया, हालांकि बाद में बीपीएल, स्टेट बीपीएल एवं अंत्योदय योजना के तहत वितरण किया गया। एपीएल श्रेणी के लाभार्थी दो माह से गेहूं प्राप्त करने से वंचित रह रहे हैं। अब शहरी क्षेत्र में 53 प्रतिशत के हिसाब से वितरण के लिए डीलर नगर परिषद प्रशासन से सूची मांग रहे हैं।

वितरण में हो रही परेशानी: राशन डीलर एसोसिएशन की स्थानीय शाखाध्यक्ष मुकेश पाठक ने बताया कि सूची के आधार पर गेहूं नहीं मिलने से वितरण में परेशानी हो रही है। उनसे 53 प्रतिशत के हिसाब से वितरण को कहा गया है। ऎसे में वे किसे दें, किसे नहीं। नगर परिषद प्रशासन भी नवीन सूची उपलब्ध नहीं करा रहा।
आदेश मिलें तो कराएंगे पुन: सर्वे: नगर परिषद आयुक्त शिवपाल सिंह ने बताया कि सर्वे के आधार पर पात्र मिली यूनिटों की सूची बनाई गई थी। इसमें 73 प्रतिशत यूनिटों का चयन हुआ, लेकिन खाद्य विभाग के अनुसार 53 प्रतिशत का चयन किया जाना था। अगर आदेश मिलेंगे तो पुन: सर्वे करा लिया जाएगा।

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