फिर बात 1974 की है। उस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही थी। उस समय वाजपेयी मेरठ के जिमखाना मैदान में आए थे। जनसंघ और भाजपा ने वाजपेयी को यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। पूरे प्रदेश में उनके नाम के पोस्टर लगे हुए थे। उस समय एक नारा दिया गया था, अटल के सकल हाथों में होगी प्रदेश की बागडोर। यह काफी चर्चित हुआ था। इसके बाद 1977 में विधानसभा भंग हो गई। दोबारा चुनाव की आशंका के बीच वह फिर मेरठ पहुंचे थे। इस दौर में कई पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई थी। टिकट लेने के लिए दावेदारों कली लाइन लगी हुई थी। यह देखकर वाजपेयी ने कहा था, टिकट के लिए ऐसी मारामारी पहले कभी नहीं देखी, पार्टी का अनुशासन तार तार हो गया है। जनता पार्टी के टिकट पर जो भी लड़ेगा वह जीत ही जाएगा।