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भारत बंद को लेकर सवर्णो ने दी अब यह चेतावनी, केंद्र सरकार की बढ़ सकती है मुश्किलें

केंद्र सरकार दुवारा एससी/एसटी एक्ट संशोधन बिल के विरोध मेंं सवर्ण और ओबीसी वर्ग सड़कों पर उतर विरोध प्रदर्शन जताया
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नोएडा

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Virendra Kumar Sharma

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Updated: 6 Sep 2018, 3:45 PM IST

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भारत बंद को लेकर सवर्णो ने दे दी अब यह चेतावनी, केंद्र सरकार की बढ़ सकती है मुश्किलें

नोएडा. केंद्र सरकार दुवारा एससी/एसटी एक्ट संशोधन बिल के विरोध मेंं गुरुवार को सवर्ण और ओबीसी वर्ग सड़कों पर उतर विरोध प्रदर्शन जताया। इस दौरान जगह-जगह मार्केट व अन्य व्यापारिक संस्थानों को बंद कराया गया। सवर्णो के प्रदर्शन को देखते हुए वेस्ट यूपी के कई जिलों में धारा-144 लागू करनी पड़ी है। इस मौके पर लोगों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।

यह भी पढ़ें: सवर्ण और ओबीसी वर्ग उतरा सड़कों पर तो पुलिस को उठाना पड़ा यह कदम

अखिल भरतीय ब्राह्मण महासभा, वैश्य समाज, राजपूत समाज, ओबीसी समेत अन्य समाज के लोगों ने एकजूट होकर भारत बंद किया था। यहां के वेस्ट यूपी में भारत बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। जगह-जगह सवर्ण समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। यहां के गौतमबुद्धनगर में काली पट्टी बांधकर लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। हालाकि यूपी में छुटपुट घटनाएं सामने आई है। आगरा में दलित और सवर्णो के बीच में पथराव हुआ है। जिसके बाद में पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा है। आगरा के बाद में बिहार के आरा नगर थाने के आनंदनगर इलाके में बंद समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़प सामने आई है। इस दौरान दलित और सवर्णो के बीच में फायरिंग।

इस दौरान सवर्ण समाज की तरफ से शांति की अपील की गई है। अखिल भरतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय संयोजक युवा मोर्चा पंडित रविंद्र शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण महासभा की तरफ से पहले ही देशव्यापी बंद के चलते शांति की अपील की गई थी। इस दौरान किसी भी हिसंक घटना में शामिल न होने की हिदायत सर्व समाज के लोगों को दी गई थी। उन्होंने बताया कि एससी एसटी एक्ट को लेकर सर्व समाज की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। अगर केंद्र सरकार बिल को वापस नहीं लेती है तो 2019 में होने वाले चुनाव के दौरान बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दौबारा से देश व्यापी बंद किया जाएगा।

यह है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट को दुरुपयोग मानकर नई गाइड लाइन जारी की थी। जिसके मुताबिक एससी/एसटी एक्ट के तहत घटना में तुरंत मुकदमा दर्ज करने से मना किया गया था। साथ ही डीएसपी रैंक के अधिकारी से जांच की बात कहीं गई थी। उसके बाद ही एफआईआर कर जेल भेजने का प्रावधान तय किया गया था। यह दलितों को रास नहीं आई और दलितों ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया था। दलितों के विरोध को देखते हुए बिल को वापस ले लिया था। केंद्र सरकार की तरफ सेे वापस लिए गए बिल का विरोध सवर्ण कर रहे है।