कैराना उपचुनाव में विपक्षी एकता का होगा ट्रायल

28 मई को मतदान, लेकिन बसपा और कांग्रेस की एडवाइजरी का इंतजार

By: Ashutosh Pathak

Published: 24 May 2018, 10:25 AM IST

शामली। कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव 28 मई दिन सोमवार को है। मतदान के ठीक पहले बुधवार को आम आदमी पार्टी ने रालोद-सपा प्रत्याशी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। वहीं, कांग्रेस और बसपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे हैं। जबकि लोक दल विपक्षी गठबंधन में शामिल नहीं हुआ है और उसने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ भाजपा यह चुनाव अकेले दम पर लड़ रही है। उसने किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं किया है।

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यह उपचुनाव कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विशलेषक इस उपचुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव के ट्रायल के रूप में भी देख रहे हैं। संभवत: यह पहला ऐसा चुनाव होगा जिसमें भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई हैं।
बता दें कि बाबू हुकुम सिंह 2014 में भाजपा के टिकट पर यहां से चुनाव जीतकर सांसद बने थे। लेकिन गत 3 फरवरी को बीमारी से उनकी मौत होने के बाद यह सीट रिक्त चल रही थी। इसी सीट पर उपचुनाव 28 मई 2018 को है। जिसकी मतगणा 31 मई को होगी।

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बसपा और कांग्रेस की एडवाइजरी का इंतजार

कैराना उपचुनाव में बसपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी तो मैदान में नहीं उतारे हैं, लेकिन इन दोनों ही दलों ने रालोद-सपा प्रत्याशी के समर्थन में खुलकर प्रचार भी शुरु नहीं किया है। इससे पहले गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने कॉर्डिनेटर्स को बकायदा यह एडवाइजरी जारी की थी कि वे प्रचार के लिए लोगों के बीच जाएं और बसपा के वोट सपा गठबंधन प्रत्याशी को देने की अपील करें। सूत्रों की मानें तो इन दोनों ही दलों के नेता कैराना उपचुनाव में प्रचार किए जाने को लेकर हूहापोह की स्थिति में हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से बुधवार को किए गए समर्थन के घोषणा के बाद माना जा रहा कि कांग्रेस और बसपा भी जल्द ही अपने नेताओं के लिए एडवाइजरी जारी कर सकती है।
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भाजपा ने मृगांका और विपक्ष ने तबस्सुम को उतारा मैदान में
इस उपचुनाव में भाजपा ने दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वहीं रालोद-सपा ने तबस्सुम हसन को मैदान में उतारा है। इस चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा नामांकन पत्र में दिए गए ब्यौरा के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह पोस्ट ग्रेजुएट हैं। जबकि रालोद-सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन हाईस्कूल पास हैं। वहीं लोक दल प्रत्याशी कंवर हसन एमबीए हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी रणधीर सिंह पीसीएस अधिकारी हैं जो कि अभी सस्पेंड चल रहे हैं। इन्होंने एमए अंग्रेजी, बीएड, एमफिल, एलएलएम, पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।

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2014 में किसको कितने प्रतिशत मिले वोट

हालांकि, 2014 में कैराना में हुए लोकसभा चुनाव का परिणाम देखें तो भाजपा को कुल मतदान का आधे से ज्यादा मत मिला था। वहीं, सभी विपक्षी दल इसके करीब भी नहीं पहुंच पाए थे।
पार्टी प्रत्याशी का नाम कुल वोट प्रतिशत
भाजपा हुकुम सिंह 5 लाख 65 हजार 909 50.54
सपा नाहीद हसन 3 लाख 29 हजार 81 29.49
बसपा कंवर हसन 1 लाख 60 हजार 414 14.33
रालोद-कांग्रेस करतार सिंह भड़ाना 42 हजार 706 3.81
तृणमूल कांग्रेस दिवांकर कश्यप 6 हजार 562 0.56

इस उपचुनाव में किसके क्या मुद्दे

भाजपा जिन मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है वह है ‘सबका साथ सबका विकास, गुड गवर्नेंस, मोदी सरकार के चार साल, योगी सरकार का एक साल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भय मुक्त बनाना और हिंदुओं का कैराना समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख जिलों से पलायन।’ इसके अलावा भाजपा पूर्व की सपा सरकार के कार्यकाल में हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र अपने प्रचार में लगातार कर रही है। इन सबके अलावा भाजपा अपने सांसद दिवंगत हुकुम सिंह के नाम पर साहनूभुति के आधार पर लोगों से वोट देने की अपील कर रही है। दूसरी तरफ विपक्ष भाजपा के झूठे वादे, किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी, महंगाई, मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसे मुद्दे उठा रहा है।

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