आपकी बात, पेयजल व्यवस्था में सुधार कैसे हो सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 21 Feb 2021, 07:39 PM IST

पानी का दुरुपयोग रोका जाए
पेयजल की व्यवस्था इतनी बिगड़ी हुई है कि आमजन को पीने के लिए पर्याप्त पानी भी नहीं मिल पाता है। इसका एक कारण है पानी का दुरुपयोग। जहां पानी उपलब्ध है, वह जनता इसका दुरुपयोग करती है। पानी को सड़कों पर बहाते हैं। गाडिय़ां धोते हैं, मकान धोते हैं। नहाने, कपड़े धोने और बर्तन धोने में पानी का बहुत ही दुरुपयोग करते हैं। यदि आमजन पानी का सदुपयोग करे, तो पेयजल संकट कम हो सकता है। साथ ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों से रिसने वाले पानी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि पाइपों को समय पर ठीक करा दिया जाए या नए पाइप लगा दिए जाएं तो, पेयजल की व्यवस्था में काफी हद तक सुधार हो सकता है।
-सुरेंद्र बिंदल , जयपुर
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जलदाय विभाग की आय कम
असल में पेयजल व्यवस्था देखने वाले विभागों की आय इतनी कम होती है कि तंत्र में सुधार नहीं हो पाता। इसलिए इनकी आय बढ़ाने के उपाय जरूरी हैं। जलापूर्ति के लिए तर्कसंगत शुल्क वसूला जाए। औद्योगिक उपयोग के लिए वितरित जल की सीमा निश्चित की जानी चाहिए।
-बलवीर ठाकुर, बिलासपुर
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विकृत है विकास का मॉडल
नए उभरते हुए शहरों में कभी पाइपलाइन तो, कभी सीवर लाइन या फिर केबल के लिए बार-बार गड्ढे खोदे जाते हैं, जिससे दूसरी पाइपलाइनें प्रभावित होती हैं और जनसाधारण को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को विकास का ऐसा रोल मॉडल विकसित करना चाहिए, जो एकीकृत हो।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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जल को स्वच्छ करें
आजकल लोग पेयजल की गुणवत्ता के प्रति सजग नजर आते हैं। स्वच्छ पेयजल के लिए प्रत्येक घर में फिल्टर मशीन लगानी चाहिए। पानी को उबालकर पीना चाहिए, क्योंकि पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती हैं, जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक हैं। दूषित जल में बैक्टीरिया होते हैं, जो अनेक प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं। जल को स्वच्छ करने के लिए अनेक प्रकार के रसायनों का भी उपयोग किया जा सकता हैं।
-पारुल कुमावत, जयपुर
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जन सहभागिता जरूरी
पेयजल प्रबंधन व व्यवस्था सुधार के लिए जन सहभागिता के बिना सफलता हासिल नहीं की जा सकती है। ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए न्यूनतम अनुरक्षण शुल्क लागू कर दिया जाना चाहिए, जिससे साझेदारी में वृद्धि हो एवं जल व्यवस्था सुधार के लिए धन मिल सके। जल व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। जल का समुचित उपयोग करें। साथ ही वर्षा जल का संग्रहण करना अति आवश्यक है।
-विद्याशंकर पाठक सरोदा डूंगरपुर
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कथनी और करनी में अंतर
बातें हर घर तक नल कनेक्शन की हो रही हैं और जिन घरों में नल कनेक्शन हो चुके हैं, उनमें पानी नहीं आ रहा है। यह विडंबना ही है कि आजादी के सत्तर बरस बाद भी लोग स्वच्छ पानी को तरस रहे हैं। इसके लिए केंद्र और राज्यों की सरकारें ही जिम्मेदार हैं, तो बातें तो बड़ी-बड़ी करती हैं, लेकिन काम करने से बचती हैं।
-साकेत वर्मा, जयपुर
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जलदाय विभाग की लापरवाही
असल में जल के प्रबंधन पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा। यही वजह है कि शुद्ध जल भी घर तक पहुंचते-पहुंचते दूषित हो जाता है। इस तरह सरकार की कार्य प्रणाली की वजह से अमृत भी जहर बन जाता है। जलदाय विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए।
-रमेश शर्मा, कोटा
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पानी की बर्बादी
जल ही जीवन है। इसके बावजूद लोगों तक स्वच्छ जल पहुंचाने के मामले में घोर लापरवाही बरती जा रही है। इसकी एक वजह कृषि कार्य में जल की बर्बादी भी है। उपलब्ध जल का बड़ा हिस्सा कृषि कार्य में काम आता है, लेकिन सिंचाई के गलत तरीकों की वजह से बड़ी मात्रा में जल की बर्बादी होती है।
-नरेश चौधरी, सीकर
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पानी की खपत कम करें
आधुनिक जीवनशैली ने पानी की खपत को बढ़ाया है। जब गर्मियों में पीने के लिए पानी की भी मशक्कत करनी पड़ती है, तो कूलरों के लिए पानी कहां से आ सकता है। आधुनिक शौचालयों में भी पानी की खपत बहुत ज्यादा होती है। घरों की धुलाई आदि के लिए भी पानी बर्बाद किया जाता है। इसलिए पानी की खपत कम करने वाली जीवनशैली पर ध्यान दिया जाए।
-प्रकाश यादव, बांसवाड़ा

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