सेना लेजर तकनीक से सुसज्जित: कूटनीति में मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा

अमरीका, रूस और चीन के साथ ही हाई पॉवर लेजर बीम रखने वाले देशों के क्लब में अब भारत भी शामिल हो गया है

By: सुनील शर्मा

Published: 09 Dec 2017, 09:32 AM IST

- अफसर करीम, रक्षा विशेषज्ञ

यह तकनीक कुछ वैसी ही है जैसे हॉलीवुड की स्टार वार्स फिल्मों में दिखाई जाती है। विश्व में परमाणु हथियारों के बढ़ते जखीरे और निरंतर उन्नत होती मिसाइल तकनीक के मद्देनजर आज यह जरूरी हो गया है कि सुरक्षा तंत्र का आधुनिकीकरण किया जाए।

अमरीका, रूस और चीन के साथ ही हाई पॉवर लेजर बीम रखने वाले देशों के क्लब में अब भारत भी शामिल हो गया है। इस नई लेजर तकनीक से दुश्मन देश के मिसाइल, वायुयान से लेकर ड्रोन तक को हवा में नष्ट किया जा सकेगा। यह सच है कि लेजर तकनीक एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत के चिर प्रतिद्वंद्वी चीन के पास पहले से ही मौजूद है। लेकिन अन्य पड़ोसियों खासकर पाकिस्तान इससे अभी तक महरूम है।

डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने हाल ही इसका सफल परीक्षण किया है। यह तकनीक कुछ वैसी ही है जैसे हॉलीवुड की स्टार वार्स फिल्मों में दिखाई जाती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि विश्व में परमाणु हथियारों के बढ़ते जखीरे और निरंतर उन्नत होती मिसाइल तकनीक के मद्देनजर आज यह जरूरी हो गया है कि सुरक्षा तंत्र का आधुनिकीकरण किया जाए। विभिन्न चरमपंथी समूह भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए रॉकेट लांचर, ड्रोन जैसी तकनीकों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी कई छोटे-बड़े देशों के पास घोषित अथवा अघोषित रूप से किसी न किसी रूप में परमाणु हथियारों का जखीरा मौजूद है। साथ ही चीन की आक्रामक सैन्य तैयारियों और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के चलते अब यह आवश्यक हो गया है कि भारत भी अपनी सुरक्षा तैयारियां उसी के अनुरूप करे। माना जाता है कि अगर आपके पास मजबूत और आधुनिक सुरक्षा तंत्र है तो किसी विवाद में आप कूटनीतिक स्तर पर मनोवैज्ञानिक बढ़त में रहते हैं।

वर्तमान व भविष्य की सामरिक आवश्यताओं को देखते हुए जरूरत इस बात कि है कि परंपरागत हथियारों के स्थान पर अगली पीढ़ी के हथियार प्रणाली विकसित करने पर तेज गति से काम किया जाए। देश हित को सर्वोपरि रखते हुए सरकार और हमारे देश के वैज्ञानिकों को इसे प्राथमिकता देनी ही होगी। इस सफलता के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिक बधाई के पात्र है।

सुनील शर्मा
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