आपकी बात, क्या स्वदेशी कोवैक्सीन को जल्दबाजी में मंजूरी दी गई?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 06 Jan 2021, 05:13 PM IST

ट्रायल पूरा होता तो बेहतर था
ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से विकसित कोविशील्ड के साथ भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। कोवैक्सीन कोरोना वायरस के लिए भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन है। मुश्किल यह है कि ट्रायल के तीसरे चरण को पूरा किए बिना वैक्सीन को मिली मंजूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कोई भी दवा या वैक्सीन ठोक बजाकर ही बाजार में उतारी जानी चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही या जल्दबाजी खतरनाक साबित हो सकती है। समय से पहले मंजूरी देना खतरनाक हो सकता है। बेहतर तो यही था कि परीक्षण पूरा होने होने के बाद ही इसे जारी किया जाता।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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राहत भरी खबर
केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने स्वदेश में विकसित टीके कोवैक्सीन को सीमित आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। संगठन ने पर्याप्त अध्ययन और ट्रायल्स के बाद बिना कोई जल्दबाजी, विशेषज्ञों की समिति की सिफारिशों के बाद ही इसके उपयोग की स्वीकृति दी है। भारत के करोड़ों लोगों के लिए, वैक्सीन की मंजूरी कोरोना संक्रमण से निजात पाने की दिशा मे राहत भरी खबर है। वैक्सीन की मंजूरी की खबर के आते ही, विरोध भी चालू हो गया है। उनका कहना है कि कोवैक्सीन के उपयोग का फैसला जल्दबाजी मे किया गया है। यह कदम अपरिपक्व है और खतरनाक हो सकता है। इस तरह के आरोप अनुचित हैं।
-नरेश कानूनगो, बेंगलूरु, कर्नाटक
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अधूरी है ट्रायल प्रकिया
कोवैक्सीन के आपात उपयोग को मंजूरी मिल गई है। अब इस बारे में सवाल भी उठने लगे हैं। सवाल यह उठ रहे हैं कि कोवैक्सीन के ट्रायल के परीक्षण का तीसरा चरण पूरा हुए बिना ही इसके इमरजेंसी उपयोग को मंजूरी क्यों दी गई? इस तरह के मामलों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्णय होने चाहिए।
-नरेंद्र रलिया, भोपालगढ़ जोधपुर
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सही निर्णय
भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने कोरोनावायरस का टीका खुद विकसित किया है। पूरी दुनिया में कोरोना का नया स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है। लिहाजा सिर्फ वैक्सीन से देश को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। सरकार की सोच भी यही है। कोवैक्सीन को बैकअप के तौर पर रखा गया है।
-सचिन सिंह परिहार, देवास, मध्यप्रदेश
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जल्दबाजी में मिली मंजूरी
पूरी दुनिया में कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन का निर्माण किया जा रहा है। भारत में भी स्वदेशी कोवैक्सीन का निर्माण किया गया है। वैक्सीन का ट्रायल तीन चरणों में किया जा रहा है। कोवैक्सीन के ट्रायल के दो चरण ही हुए थे। उसके बाद इसे मंजूरी दे दी गई। यह उचित नहीं है, क्योंकि जो वैक्सीन है उसका तीन चरण में ट्रायल होने के बाद ही पता लगता है कि वह कितनी कारगर है। अत: मुझे लगता है कि स्वदेशी कोवैक्सीन को जल्दबाजी में मंजूरी दी है।
-पंडित महेंद्र कुमार चतुर्वेदी, हनुमानगढ़ जंक्शन
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राजनीतिक दल गुमराह न करें
एक ओर जहां देश में कोरोना से जंग के लिए दो वैक्सीन को मंजूरी मिलने की खुशी है, तो दूसरी ओर इसे लेकर सियासत भी हो रही है। प्रमुख दल कांग्रेस ने स्वदेशी टीके कोवैक्सीन को मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया पर चिंता जताई है, जो कि निरर्थक है। यह मात्र एक अफवाह है। राजनीति दलों को ऐसे विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। इससे जनता गुमराह होती है।
-खुशबू वेद, आलोट,मप्र
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लम्बी प्रक्रिया
वैक्सीन निर्माण के दौरान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानदण्डों का पालन करना होता है। यह एक लम्बी प्रक्रिया है। ऐसे में स्वदेशी कोवैक्सीन पर संदेह करना उचित नहीं। टीकाकरण के दौरान यह ध्यान रखना होगा कि कहीं नकली कोवेक्सीन लगाने वाले गिरोह सक्रिय न हो जाएं।
-नरेन्द्र कुमार शर्मा, मालवीय नगर, जयपुर
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वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम
कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन को जल्दबाजी में मंजूरी नहीं दी गई। जल्दबाजी में मंजूरी देकर सरकार आम लोगों की जान क्यों खतरे में डालेगी?ï हमारे देश के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने इसके लिए दिन-रात मेहनत लंबे समय से की है। ध्यान रहे जब तक यह वैक्सीन कोरोना को हराने में शत प्रतिशत कामयाब नहीं होती, तब तक हमें कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करना ही होगा।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर
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ट्रायल पूरा कर लेते तो ठीक रहता
कोरोना से बचाव के लिए स्वदेशी वैक्सीन विकसित करना अच्छी बात है, मगर पहले इसका ट्रायल पूरा कर लेते तो ज्यादा बेहतर था। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इसको लगने के बाद कोई विपरीत असर तो नहीं होगा। यह कितना प्रभावी है? इस वैक्सीन को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद लोग आंशकित हैं।
-शैलेंद्र गुनगुना झालावाड़
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प्रभावी है कोवैक्सीन
कोवैक्सीन का निर्माण कार्य काफी लंबे समय से चल रहा था। कोवैक्सीन को प्रभावी पाए जाने के बाद ही मंजूरी दी गई है। इसके निर्माण में वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया गया है। इसीलिए यह सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन है। इसके अलावा ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने समस्त प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए ही कोवैक्सीन के इस्तेमाल के लिए इजाजत दी है
-शुभम वैष्णव, सवाईमाधोपुर

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