जमा पूंजी : मददगार साबित होगी पॉवर ऑफ अटॉर्नी

विदेश में रहते हुए भारत में संपत्ति से जुड़े मसलों के लिए उपयोगी टूल है पॉवर ऑफ अटॉर्नी ।

By: विकास गुप्ता

Updated: 21 Jul 2021, 12:56 PM IST

असीम त्रिवेदी, (सीए, ऑडिटिंग एंड अकाउंटिंग स्टैंडर्ड, कंपनी मामलों के जानकार)

जोशी जी के दोनों पुत्र ब्रिटेन में रहते हैं। जोशी जी का पिछले महीने देहांत हो गया था। कल उनके बेटे मोहित का फोन आया कि वसीयत के अनुसार उनके पिता की भारतीय सम्पत्ति उनकी हो गई है, पर अब उस सम्पत्ति की देखभाल संभव नहीं है। इस वक्त भारत आना भी संभव नहीं है। रिश्तेदार रोज फोन लगा कर खाली सम्पत्ति के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने को कह रहे हैं। एक मकान छोटे भाई के ससुराल वाले खरीदने को तैयार हैं, दूसरे को हम सोच रहे हैं किराए पर दे दें, ये सब कैसे निपटाएं। मैंने कहा - इन कामों के लिए आपका भारत आना जरूरी नहीं है। आप भरोसे के आदमी के नाम एक स्पेशल पॉवर ऑफ अटर्नी बना कर भारत भेज दें, वह सारा काम कर देगा। पॉवर ऑफ अटर्नी से आपके द्वारा नियुक्त व्यक्ति मकान खरीद-बेच सकता है, किरायेदार के साथ अनुबंध कर सकता है।

दोनों पहले पक्षकारों के साथ वीडियो मीटिंग कर लें, शर्तें तय कर लें, ड्राफ्ट अनुबंध ई-मेल पर मंगवा कर अच्छे से पढ़ लें, और फिर उस भरोसेमंद व्यक्ति से कह दें कि आपकी ओर से रजिस्ट्रार के समक्ष पॉवर ऑफ अटर्नी पेश कर अनुबंध का पंजीयन करवा ले। मोहित बोला - मुझे किसी पर भरोसा नहीं है सिवाय एक मित्र के जो भारत में ही रहता है, लेकिन वह पेशे से सीए है। ऐसे में कोई चिंता की बात तो नहीं है। मैंने कहा - अभी इस काम के लिए न आना पड़े, इसके लिए किसी पर तो भरोसा करना ही होगा। किसी वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी के पक्ष में पॉवर ऑफ अटर्नी का सकारात्मक पहलू यह है कि ये लोग पेशेवर आचरण की आचार संहिता में बंधे होते हैं। यदि ये शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं, तो इनके विरुद्द इनकी नियामक संस्थाओं में शिकायत की जा सकती है।

मैंने मोहित को अपने भारतीय मित्र से जरूरी कागजात ब्रिटेन मंगवाने, भारतीय दूतावास जाकर मित्र के नाम पॉवर ऑफ अटर्नी बनवाने (जिसमें विशिष्ट कार्यों का स्पष्ट उल्लेख हो, जिनका निष्पादन करना है), उसे दूतावास में रजिस्टर करवा रजिस्टर्ड डाक से भेजने और भारत में भी मित्र के जरिए पंजीयन सुनिश्चित कराने के लिए कहा। मोहित ने राहत की सांस ली। अब उसे अपनी समस्या का हल मिल चुका था।

विकास गुप्ता
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