हम तैयार हैं!

कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका ने जैसे पूरे देश की जनता को एकजुट और जागरूक कर दिया है।

Bhuwanesh Jain

25 Mar 2020, 11:58 AM IST

रविवार की शाम ठीक 5 बजे पूरे भारत में अद्भुत नजारा देखने को मिला। हर घर की छत, बालकनी, द्वार और आंगन में लोग निकल आए। किसी के हाथ में थाली थी तो किसी के हाथ में मंदिर की घंटी या शंख। कोई-कोई तो वाद्य यंत्र लेकर ही निकल आया। बहुत से लोग तालियां भी बजाते रहे। क्या बुज़ुर्ग, क्या बच्चे- सब में गजब का जोश था। लगातार पांच मिनट तक हर दिशा ध्वनि से गुंजायमान होती रही। लोग मानों कोरोना को चुनौती दे रहे हों- "भागो यहां से। हम तैयार हैं तुमसे निपटने को"। यह ध्वनि चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और उन मीडियाकर्मियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए गूंजी जो अपनी जान जोखिम में डाल कर जनता की सेवा में जुटे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सुबह शुरू हुए 'जनता कर्फ्यू' का नजारा भी आश्चर्यजनक रहा। जयपुर की सड़कों, गलियों, बाजारों में ऐसा सन्नाटा छाया रहा जैसे सरकारी कफ्र्यू में भी दुर्लभ होता है। बिना किसी जोर-जबरदस्ती के और स्वत: स्फूर्त! देश के दूसरे हिस्सों से भी ऐसे ही नजारों के चित्र और वीडियो देखने को मिल रहे हैं। राजस्थान सरकार तो इस बात के लिए भी बधाई की पात्र है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में इसने पूरे देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण स्थापित कर दिया- 31 मार्च तक राजस्थान में लॉकडाउन कर के। जो कदम दूसरे राज्यों को कुछ दिन बाद उठाने पड़ेगे, वे राजस्थान में सबसे पहले उठा लिए गए। बुद्धिमत्ता भी इसी में है कि हालत बिगडऩे का इंतजार करने की बजाय पहले ही सबकुछ चाक-चौबंद कर दिया जाए। जनता को कुछ दिक्कतें तो होंगी, लेकिन चौखट पर खड़ी भयावह महामारी को घर में घुसकर आक्रमण करने से रोकने के लिए दरवाजे-खिड़कियां सबसे पहले बंद करने जरूरी है।

ऐसे संकट के समय समाज के निचले तबके के लोगों के सामने रोज़ी रोटी का संकट पैदा हो सकता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि अपने से जुड़े और अपने आस-पास के इस तबके के लोगों का ध्यान रखें और जरूरत होने पर उन्हें हर संभव मदद पहुंचाएं। संवेदनशीलता और इंसानियत का तो यही तकाजा है।

कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका ने जैसे पूरे देश की जनता को एकजुट और जागरूक कर दिया है। कुछ दिन पहले तक जहां लूट-खसोट, राजनीति की उठा-पटक और धोखा-फरेब की खबरें रोज सुनने को मिल रही थीं, भले ही संक्रमण के डर के कारण हों, ऐसी घटनाओं में कमी आ गई है। और आज के जनता कफ्र्यू ने तो जैसे चारों ओर ताजी हवा के झोंके चला दिए। शोर थम गया। प्रदूषण कम हो गया। पक्षियों की चहचहाहट तक साफ सुनाई देने लगी। कई दिनों के बाद घर की मिठास चखने का मौका मिला। यह बात समझ में आई कि भाग दौड़ में क्या छूट रहा था। इतने दिनों की मानो थकान उतर गई। आसमान भी हल्का नजर आया और आदमी भी। हर चेहरा खिला खिला। मानो सब का बचपन लौट आया। सब योद्धा लग रहे थे। डर गया होगा कोरोना। 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) का नया अनुभव जनता को हुआ। ऑनलाइन क्रियाकलाप एकदम बढ़ गए। व्यस्त दिनचर्या में पहली बार ठहराव का एहसास हुआ।

कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया जूझ रही है। बहुत से देशों ने इसे हल्के में लिया, जिसका नतीजा सब भुगत रहे हैं। जनता और सरकार- सभी को सचेत रहना जरूरी है। प्रधानमंत्री के आह्वान की सफलता इस बात की ***** है कि देश की जनता पूरी तरह जागरूक है। अब बारी राज्य सरकारों की है। गहलोत सरकार ने सही समय पर दृढ कदम उठाकर रास्ता दिखा दिया है। आने वाले दिनों में उन्हें 'लॉकडाउन' जैसे कदमों को अपनाना ही पड़ेगा- तो अभी से क्यों नहीं?

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भुवनेश जैन
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