सियासी नाटक क्यों?

तो ये है आज के समाजवादियों का समाजवाद। भाजपा से मिलकर समाजवादी पार्टी को कमजोर करने समेत

By: मुकेश शर्मा

Published: 17 Nov 2016, 11:22 PM IST

तो ये है आज के समाजवादियों का समाजवाद। भाजपा से मिलकर समाजवादी पार्टी को कमजोर करने समेत अनेक गंभीर आरोप लगाकर छह साल के लिए निकाले गए रामगोपाल यादव को 25 दिन में ही फिर पार्टी में शामिल कर लिया गया। राज्यसभा में समाजवादी पार्टी संसदीय दल के नेता और पार्टी महासचिव रामगोपाल पर भाजपा से मिलीभगत के आरोप उनके विरोधियों ने नहीं बल्कि स्वयं पार्टी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने खुलेआम लगाए थे।


 शिवपाल ने तो यहां तक कहा था कि घोटाले में फंसे अपने बेटे व बहू को बचाने के लिए रामगोपाल भाजपा नेताओं से गुपचुप मुलाकात कर रहे हैं। 'राजनीतिक परिवारोंÓ में वर्चस्व को लेकर संघर्ष पहली बार नहीं हुआ है। समाजवादी पार्टी से पहले द्रमुक से लेकर राजद और राकांपा से लेकर तेलुगुदेशम में वर्चस्व की लड़ाई का खेल पहले भी हुआ है। लेकिन समाजवादी पार्टी में दो महीने तक चले सियासी ड्रामे ने बॉलीवुड की हिंदी फिल्मों तक को पीछे छोड़ दिया था।  अब जबकि रामगोपाल यादव का निष्कासन रद्द हो चुका है तो पार्टी को बताना चाहिए कि उसका पहले वाला फैसला गलत था या वह अब गलत है।

 अगर वे भाजपा से मिल पार्टी कमजोर कर रहे थे तो उन्हें वापस क्यों लिया गया? यदि ऐसा नहीं था तो उन्हें निकाला क्यों गया? ये एक परिवार के बीच संपत्ति बंटवारे भर का विवाद नहीं था। देश का सबसे बड़ा राज्य एक महीने तक ठहरा रहा तो उसके लिए दोषी कौन? इसकी क्या गारंटी है कि भविष्य में ये नाटक फिर नहीं दोहराया जाएगा। तीन महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें टिकट बंटवारा कौन करेगा? मुलायम-शिवपाल या फिर अखिलेश-रामगोपाल? सिद्धांतों के टकराव को लेकर होने वाला संघर्ष तो समझा जा सकता है लेकिन किसी भी दल में इस तरह का टकराव न लोकतंत्र के लिए शुभ माना जा सकता है और न ही देश और प्रदेश के लिए।
मुकेश शर्मा Reporting
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